‘अस्सी’ के रेप सीन पर बोले अनुभव सिन्हा: “बिना लड़की के शूट किया, ताकि घिन महसूस हो”

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कोर्टरूम ड्रामा में यौन हिंसा को दिखाने के तरीके पर खुलकर की बात

सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बनाने के लिए पहचाने जाने वाले निर्देशक अनुभव सिन्हा की हालिया रिलीज फिल्म ‘अस्सी’ इन दिनों चर्चा में है। ‘मुल्क’, ‘आर्टिकल 15’, ‘थप्पड़’ और ‘अनेक’ जैसी फिल्मों के बाद उनकी नई फिल्म ‘अस्सी’ एक कोर्टरूम ड्रामा है, जो रेप जैसे जघन्य अपराध पर केंद्रित है। फिल्म में दिखाए गए रेप सीन को लेकर निर्देशक ने हाल ही में खुलकर बातचीत की और बताया कि उन्होंने इस सीन को बिना किसी लड़की के शूट किया।

“पहले कभी रेप सीन शूट नहीं किया था, बहुत परेशान था”

एक इंटरव्यू में अनुभव सिन्हा ने बताया कि उन्होंने पहले कभी रेप सीन फिल्माया नहीं था, इसलिए वे इसे लेकर बेहद असहज और चिंतित थे। उनका कहना था कि ऐसे सीन फिल्माते वक्त अक्सर स्किन शो का खतरा रहता है और दृश्य कब एक घिनौने अपराध से हटकर ‘विजुअल एक्सप्लॉइटेशन’ में बदल जाए, इसका अंदेशा बना रहता है।

उन्होंने कहा कि वे इस बात को लेकर बेहद सतर्क थे कि सीन कहीं भी ‘दृश्यरतिक’ न लगे और अपराध की भयावहता कम न हो।

बिना लड़की के शूट किया पूरा सीन

अनुभव सिन्हा ने खुलासा किया कि ‘अस्सी’ के उस विवादित सीन को उन्होंने बिना किसी अभिनेत्री के शूट किया। उनके मुताबिक, उस पूरे दृश्य में लड़की दिखाई ही नहीं देती।

उन्होंने कहा, “उस सीन में लड़की का चेहरा या शरीर नहीं दिखता। कुछ शॉट्स ऐसे हैं जो संकेत देते हैं, लेकिन पूरा दृश्य आपकी कल्पना पर छोड़ दिया गया है। आप जितना इस अपराध को घिनौना समझेंगे, उतना ही आपको वह सीन विचलित करेगा। यहां तक कि अगर आप आंखें बंद भी कर लें, तब भी उसकी भयावहता सुनाई देगी।”

रेप को ‘नॉर्मल’ मानने की सोच तोड़ना चाहते थे

निर्देशक का कहना है कि आजकल लोग रेप की खबरें इतनी बार पढ़ते और सुनते हैं कि कहीं न कहीं समाज में इसकी संवेदनशीलता कम होती जा रही है। उन्होंने इस सीन को दिखाने के पीछे का मकसद स्पष्ट करते हुए कहा कि वे चाहते थे कि जब भी कोई भविष्य में इस अपराध के बारे में सुने, तो उसके मन में घिन और असहजता पैदा हो — न कि सामान्य भावना।

सामाजिक सिनेमा की परंपरा को आगे बढ़ाती ‘अस्सी’

अनुभव सिन्हा की फिल्में अक्सर सामाजिक मुद्दों को गंभीरता से उठाती रही हैं। ‘अस्सी’ भी उसी कड़ी का हिस्सा है, जहां कोर्टरूम ड्रामा के जरिए यौन हिंसा जैसे संवेदनशील विषय पर चर्चा की गई है। फिल्म में दिखाया गया सीन भले ही असहज कर देने वाला हो, लेकिन निर्देशक का दावा है कि इसका उद्देश्य केवल समाज को आईना दिखाना है, न कि सनसनी फैलाना।

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