सड़क धंसने और दरारों की शिकायतों के बाद NHAI ने PNC इंफ्राटेक को नॉन-परफॉर्मर घोषित किया, टेक्निकल कमेटी निर्माण की गुणवत्ता और इंजीनियरिंग खामियों की जांच कर रही है
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में लापरवाही और खराब गुणवत्ता की शिकायतों के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने सख्त कार्रवाई की है। एक्सप्रेसवे का निर्माण करने वाली कंपनी PNC इंफ्राटेक को नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया गया है। इसके साथ ही कंपनी को तीन साल के लिए NHAI की सभी परियोजनाओं से डिबार कर दिया गया है।
एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के कुछ समय बाद ही सड़क का एक बड़ा हिस्सा धंसने की शिकायत सामने आई थी। इसके अलावा कई जगह सड़क की ऊपरी सतह खिसकने और बड़ी दरारें आने की भी शिकायतें मिली थीं। इसके बाद NHAI ने मामले की जांच के लिए एक टेक्निकल कमेटी गठित की थी।
निर्माण की गुणवत्ता और डिजाइन की जांच
NHAI की टेक्निकल कमेटी एक्सप्रेसवे के निर्माण में इस्तेमाल की गई सामग्री, डिजाइन और इंजीनियरिंग से जुड़ी संभावित खामियों की जांच कर रही है। हाई-स्पीड कॉरिडोर में सामने आई इन समस्याओं के बाद निर्माण और निगरानी की प्रक्रिया पर भी सवाल उठे थे।
PNC इंफ्राटेक पर पहले भी हुई कार्रवाई
इससे पहले NHAI ने PNC इंफ्राटेक पर 2 प्रतिशत जुर्माना लगाया था और उसे नॉन-परफॉर्मर घोषित करने की सिफारिश की थी। निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़ी स्वतंत्र इंजीनियर कंपनी थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज को भी डिबार करने का नोटिस दिया गया था।
देखरेख और निर्माण में चूक के आरोपों के बाद PNC के प्रोजेक्ट मैनेजर विवेक गुप्ता, रेजिडेंट इंजीनियर यतेंद्र कुमार और इंडिपेंडेंट इंजीनियर्स के टीम लीडर सुरेंद्र कुमार को तत्काल पद से हटा दिया गया था। इन तीनों अधिकारियों के NHAI, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और NHIDCL की परियोजनाओं में अगले दो साल तक काम करने पर भी रोक लगाई गई थी।
प्रोजेक्ट डायरेक्टर पर भी कार्रवाई
NHAI ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर नकुल प्रकाश वर्मा को भी उनके पद से हटा दिया था। वहीं, पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर सौरभ चौरसिया को कारण बताओ नोटिस यानी चार्जशीट जारी की गई थी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में सामने आई तकनीकी खामियों की जांच अभी जारी है। टेक्निकल कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर निर्माण की गुणवत्ता और जिम्मेदारी से जुड़े आगे के कदम तय किए जाएंगे।

