CJP का ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान, गढ़चिरौली से होगी शुरुआत; 590 से ज्यादा छात्रों की मौत का दावा

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अभिजीत दिपके ने आदिवासी स्कूलों की बदहाली और छात्रों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया, बोले- 720 में से 477 एकलव्य स्कूल संचालित नहीं

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने आदिवासी स्कूलों की स्थिति को लेकर नया अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ नाम से यह अभियान 17 सितंबर से महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में शुरू किया जाएगा। दिपके का आरोप है कि पिछले 80 वर्षों से आदिवासी इलाकों के स्कूलों की पर्याप्त रूप से अनदेखी की गई है।

नागपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिपके ने कहा कि अभियान का उद्देश्य आदिवासी छात्रों की समस्याओं, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी और उनके साथ कथित भेदभाव की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। अभियान के तहत CJP के प्रतिनिधि आदिवासी स्कूलों का दौरा कर वहां की सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर का जायजा लेंगे।

‘सभी सरकारों ने आदिवासी स्कूलों की अनदेखी की’

अभिजीत दिपके ने आरोप लगाया कि अलग-अलग सरकारों ने आदिवासी इलाकों में शिक्षा व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी छात्रों में प्रतिभा की कमी नहीं है और सरकार को उनकी शिक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सिर्फ आर्थिक विकास और जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों को बेहतर शिक्षा और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

CJP इससे पहले देशभर में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू कर चुकी है। नया अभियान विशेष रूप से आदिवासी इलाकों के स्कूलों की स्थिति पर केंद्रित होगा।

महाराष्ट्र में 590 से ज्यादा आदिवासी छात्रों की मौत का दावा

दिपके ने दावा किया कि महाराष्ट्र में पिछले दो वर्षों के दौरान 590 से ज्यादा आदिवासी छात्रों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि इनमें कुछ मौतें सांप के काटने जैसी घटनाओं से हुईं और आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं पर पर्याप्त सरकारी प्रतिक्रिया नहीं हुई।

उन्होंने मध्य प्रदेश के बालाघाट में भी पिछले दो महीनों में 30 से ज्यादा आदिवासी छात्रों की मौत का दावा किया। इसके अलावा छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड में भी आदिवासी छात्रों की मौतों का जिक्र किया। ये आंकड़े और आरोप दिपके ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में रखे हैं।

एकलव्य स्कूलों को लेकर भी उठाए सवाल

CJP संस्थापक ने एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि देश में 720 ऐसे स्कूलों में से 477 स्कूल संचालित नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर स्कूल ही ठीक से संचालित नहीं होंगे तो आदिवासी छात्र पढ़ाई के लिए कहां जाएंगे।

दिपके ने आदिवासी छात्रों के परिवारों को मिलने वाले मुआवजे को लेकर भी सवाल उठाया और दावा किया कि कई मामलों में पीड़ित परिवारों को पर्याप्त सहायता नहीं मिलती।

उच्च शिक्षा में आदिवासी छात्रों की भागीदारी पर सवाल

दिपके ने दावा किया कि उच्च शिक्षा में आदिवासी छात्रों का नामांकन दर 22.8 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी कहा कि अनुसूचित जनजाति (ST) के केवल 130 आवेदकों को आईआईटी में प्रवेश मिला।

उन्होंने आईआईटी में आदिवासी छात्रों के दाखिले और फैकल्टी की संख्या को लेकर सवाल उठाते हुए इसे भेदभाव बताया। हालांकि, ये आंकड़े और उनकी व्याख्या दिपके द्वारा लगाए गए दावों पर आधारित हैं।

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