
मुंबई। मुंबई के कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड से फैल रही दुर्गंध को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब मुंबई मनपा (बीएमसी) प्रशासन ने निर्णायक कदम उठाया है। प्रशासन ने डंपिंग ग्राउंड के प्रदूषण की जांच के लिए एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला स्थापित करने का निर्णय लिया है।
तीन महीने में पूरी होगी प्रयोगशाला स्थापना
बीएमसी अधिकारियों के अनुसार, यह प्रयोगशाला करीब 13 लाख रुपये की लागत से स्थापित की जाएगी। काम दिवाली के बाद शुरू होकर 15 दिन से तीन महीने के भीतर पूरा किया जाएगा। प्रयोगशाला के माध्यम से क्षेत्र में वायु और पर्यावरण की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा।
नागरिकों में बढ़ी स्वास्थ्य समस्याएं
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि डंपिंग ग्राउंड से उठने वाली बदबू और गैसों के कारण आसपास के इलाकों में सांस लेने में तकलीफ, खांसी, उल्टी, अस्थमा और त्वचा रोग जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ी हैं। इन समस्याओं को लेकर नागरिकों ने हस्ताक्षर अभियान भी चलाया था।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
डंपिंग ग्राउंड से हो रहे प्रदूषण और दुर्गंध की समस्या को लेकर नागरिकों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की थी। अदालत के हस्तक्षेप के बाद बीएमसी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जांच की दिशा में ठोस कदम बढ़ाया है।
वैज्ञानिक तरीके से होगी जांच
बीएमसी के ठोस कचरा प्रबंधन विभाग ने बताया कि शिकायतों का समाधान अब वैज्ञानिक तरीके से किया जाएगा। प्रयोगशाला के माध्यम से वायु, मिट्टी और जल की गुणवत्ता का परीक्षण किया जाएगा ताकि समस्या के मूल कारणों की पहचान की जा सके।
26 स्थानों पर होगा निरीक्षण
डंपिंग ग्राउंड के आसपास कुल 26 स्थानों का निरीक्षण किया जाएगा। इसमें कन्नमवार नगर, टैगोर नगर, कांजुरमार्ग (पूर्व), ड्रीम कॉम्प्लेक्स (भांडुप), विक्रोली, घाटकोपर, नाहुर, मुलुंड और ईस्टर्न एक्सप्रेस हायवे के आसपास के इलाके शामिल हैं।
संयंत्र परिसर की भी होगी निगरानी
निरीक्षण के दौरान कंपोस्ट संयंत्र, बायोरिएक्टर लैंडफिल और प्री-प्रोसेसिंग यूनिट का भी विश्लेषण किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि दुर्गंध किन इकाइयों से निकल रही है और उसे नियंत्रित करने के लिए क्या कदम आवश्यक हैं।
कंपनी ने शुरू किया पर्यावरण ऑडिट
कचरा प्रसंस्करण कार्य देख रही एंटनी लारा एनवायरो सॉल्यूशन्स कंपनी ने अपने स्तर पर पर्यावरण सेल स्थापित किया है। कंपनी ने बताया कि दुर्गंध की शिकायतों के आधार पर ऑडिट प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में प्रदूषण को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सके।

