
नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने 2026 की कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा की डेटशीट जारी कर दी है। हालांकि, तमिल को दूसरी भाषा के रूप में चुनने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों ने इसे लेकर नाराज़गी जताई है।
🧠 साइंस और तमिल परीक्षा के बीच सिर्फ एक दिन का अंतर
डेटशीट के मुताबिक, इंग्लिश की परीक्षा के बाद 23 फरवरी को तमिल की परीक्षा रखी गई है, जबकि साइंस की परीक्षा 25 फरवरी को है। यानी छात्रों को तमिल और साइंस जैसी दो कठिन परीक्षाओं के बीच तैयारी के लिए सिर्फ एक दिन (24 फरवरी) का समय मिल रहा है।
📘 साइंस विषय की तैयारी में चुनौती
माता-पिता का कहना है कि साइंस कोई एक विषय नहीं, बल्कि इसमें फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी जैसे तीन अलग-अलग सेक्शन शामिल हैं। इन तीनों विषयों को समझने और रिवीजन करने के लिए अधिक समय की जरूरत होती है।
“सिर्फ एक दिन में तीन विषयों को दोहराना लगभग असंभव है,” — एक छात्रा की माता ने कहा।
🗓️ अन्य भाषाओं के छात्रों को मिला ज्यादा समय
जिन छात्रों ने हिंदी या संस्कृत को दूसरी भाषा के रूप में चुना है, उनकी परीक्षा साइंस के बाद 28 फरवरी और 2 मार्च को है। यानी उन्हें साइंस की तैयारी के लिए तीन दिन का समय मिल रहा है।
यह अंतर छात्रों के बीच असमानता की स्थिति पैदा कर रहा है, ऐसा कहना है अभिभावकों का।
🎓 माता-पिता की शिकायतें और सुझाव
अभिभावकों का मानना है कि CBSE अब कॉन्सेप्ट-बेस्ड इवैल्यूएशन सिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जहां समझ पर आधारित प्रश्न पूछे जाते हैं। ऐसे में कठिन विषयों के बीच पर्याप्त अंतराल न मिलना छात्रों के मानसिक तनाव को बढ़ा सकता है।
उन्होंने CBSE से अपील की है कि डेटशीट पर पुनर्विचार किया जाए ताकि सभी छात्रों को समान अवसर मिले।
📢 CBSE का दृष्टिकोण और विशेषज्ञों की राय
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि डेटशीट तैयार करने में कई कारक होते हैं, जैसे —
- हर विषय के छात्रों की संख्या,
- परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता,
- और लॉजिस्टिक चुनौतियाँ।
विशेषज्ञों ने कहा कि अगर अभिभावकों को शिकायत है, तो वे CBSE परीक्षा नियंत्रक कार्यालय में लिखित रूप से अपना सुझाव भेज सकते हैं।
📚 छात्रों के लिए सुझाव
जिन छात्रों ने तमिल को दूसरी भाषा के रूप में चुना है, उन्हें साइंस की तैयारी पहले से पूरी करनी चाहिए।
एजुकेशन एक्सपर्ट का कहना है —
“अगर स्टूडेंट्स नवंबर से ही रिवीजन प्लान शुरू कर दें, तो एक दिन का गैप भी पर्याप्त साबित हो सकता है।”

