कर्नाटक में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी राजनीतिक खींचतान एक बार फिर तेज हो गई है। डीके शिवकुमार के कई समर्थक दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं, जबकि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया भी आसानी से पद छोड़ने के मूड में नजर नहीं आ रहे। विवाद बढ़ने पर कांग्रेस आलाकमान सक्रिय हो गया है और लगातार बैठकों का दौर चल रहा है। अभी तक किसी नेता के पक्ष में स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है।
सिद्धारमैया की ताकत क्या है?
सिद्धारमैया OBC समुदाय की कुरुबा जाति से आते हैं और राज्य के प्रमुख OBC नेता माने जाते हैं। कांग्रेस के सामाजिक न्याय एजेंडे में उनकी अहम भूमिका है। वे जमीनी नेता माने जाते हैं और उनकी लोकप्रियता किसी भी अन्य नेता से अधिक बताई जाती है।
कुरुबा समुदाय राज्य की लगभग 20 से ज्यादा सीटों पर प्रभाव रखता है। कांग्रेस को आशंका है कि अगर सिद्धारमैया को हटाया गया तो अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़ा हिंदू और दलित) वोट बैंक प्रभावित हो सकता है। हाल में उन्हें OBC सलाहकार परिषद का सदस्य भी बनाया गया है।
शिवकुमार की ताकत क्या है?
डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं, जिसका प्रभाव राज्य की करीब 48 विधानसभा सीटों पर है। पारंपरिक रूप से यह समुदाय JDS का वोटर माना जाता है, लेकिन शिवकुमार की वजह से कांग्रेस की ओर झुकाव बढ़ा था। ऐसे में अगर उन्हें मुख्यमंत्री पद नहीं मिलता है, तो समुदाय के वापस दूर जाने का खतरा है।
कांग्रेस के संकट मोचक हैं शिवकुमार
शिवकुमार को कांग्रेस का संकट मोचक माना जाता है। उन्होंने हिमाचल समेत कई राज्यों में पार्टी को राजनीतिक संकट से बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई है। 2018 में जब कर्नाटक में कोई दल बहुमत नहीं ला सका था, तब शिवकुमार ने कांग्रेस विधायकों को एकजुट रखा था। वे सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी के करीबी माने जाते हैं और फंड जुटाने में भी उनकी मजबूत पकड़ है।
दोनों नेताओं की कमजोरियां
सिद्धारमैया की उम्र 78 वर्ष है और अगले चुनाव तक वे 80 पार हो जाएंगे। वे पहले ही दोबारा चुनाव लड़ने से इनकार कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी के सामने सवाल है कि उनकी अगुवाई में भाजपा को कड़ी चुनौती मिल पाएगी या नहीं।
दूसरी ओर, शिवकुमार पर भ्रष्टाचार के कई मामले दर्ज हैं। वे ED के निशाने पर रहे हैं और जेल भी जा चुके हैं। यह दाग उनके नेतृत्व के लिए चुनौती बन सकता है।
कांग्रेस आलाकमान की हलचल
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे कर्नाटक दौरे से लौटकर दिल्ली पहुंच गए हैं। उन्होंने दोनों गुटों से अलग-अलग बैठकें की हैं। माना जा रहा है कि वे जल्द ही पार्टी हाईकमान को रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद सिद्धारमैया और शिवकुमार को दिल्ली बुलाए जाने की अटकलें हैं।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें क्यों?
कहा जाता है कि कांग्रेस आलाकमान ने सरकार गठन के समय ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला तय किया था। 20 नवंबर को सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हो गए, जिसके बाद नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज हो गई है। शिवकुमार समर्थक पहले भी यह मांग उठाते रहे हैं।

