झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच अभय तिवारी के परिवार तक पहुंच गई है। सीआईडी ने अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी को गिरफ्तार किया है।
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच अब अभय तिवारी के परिवार तक पहुंच गई है। मामले में सीआईडी ने अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और अभय की पत्नी सुषमा कुमारी को भी गिरफ्तार कर लिया है।
दोनों पर आरोप है कि उन्होंने जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल की परीक्षाओं में कथित तौर पर गलत तरीके से सफलता हासिल की और नौकरी प्राप्त की। सीआईडी ने दोनों को मंगलवार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की थी। पूछताछ के बाद जांच एजेंसी ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
इससे पहले इस पूरे मामले में टीडीपीएल के पूर्व मार्केटिंग मैनेजर रहे अभय तिवारी को गिरफ्तार किया जा चुका है। वह फिलहाल जेल में है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित परीक्षा गड़बड़ी का नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।
लंबे समय से आंदोलन चल रहा था
अक्षय तिवारी और सुषमा कुमारी की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। सवाल यह है कि क्या कथित तौर पर परीक्षा में अनियमितता का फायदा सिर्फ कुछ अभ्यर्थियों तक सीमित था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।
सीआईडी की जांच में अब इन्हीं सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं। इधर, जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच और परीक्षाओं को रद्द करने की मांग को लेकर छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे।
24 दिनों से धरने पर बैठे थे छात्र
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्र पिछले 24 दिनों से धरने पर बैठे थे। आंदोलनकारी जेपीएससी मामले में सीबीआई जांच की मांग भी कर रहे थे।
छात्रों के आंदोलन के बीच सरकार ने एक दिन पहले उनकी मांगों को मानते हुए टीडीपीएल की ओर से कराई गई सभी परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया। सरकार के इस फैसले के बाद अब सीआईडी की कार्रवाई ने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है।
अभय तिवारी के बाद उसके भाई और पत्नी की गिरफ्तारी से जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। हालांकि, दोनों पर लगे आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित परीक्षा गड़बड़ी की जड़ें आखिर कितनी गहरी हैं और जांच के अगले चरण में कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।

