सज्जन जिंदल के खिलाफ केस पर हाईकोर्ट का अहम फैसला
जेएसडब्ल्यू ग्रुप के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक सज्जन जिंदल के खिलाफ दर्ज बलात्कार और धमकी के मामले में उच्च न्यायालय ने दोबारा जांच शुरू करने से इनकार कर दिया है।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता महिला स्वयं ही मामले को आगे बढ़ाने में असमर्थता जता चुकी है और पुलिस द्वारा दाखिल मामला बंद करने की रिपोर्ट पर कोई आपत्ति नहीं की है। ऐसे में न्यायालयी हस्तक्षेप की गुंजाइश बेहद सीमित है।
👩 शिकायतकर्ता ने खुद जताई असमर्थता
यह मामला 32 वर्षीय महिला शिकायतकर्ता द्वारा दोबारा जांच की मांग को लेकर दायर आपराधिक याचिका से जुड़ा था। महिला ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट पर उसे कोई आपत्ति नहीं है।
इसी आधार पर अदालत ने जिंदल को राहत देते हुए याचिका खारिज कर दी।
📄 मजिस्ट्रेट के आदेश को दी गई थी चुनौती
यह आपराधिक याचिका बांद्रा स्थित महानगर दंडाधिकारी के 24 अप्रैल 2024 के आदेश को चुनौती देते हुए दाखिल की गई थी।
महानगर दंडाधिकारी ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत मामला बंद करने की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया था, जिसके खिलाफ शिकायतकर्ता ने उच्च न्यायालय का रुख किया था।
🏛️ क्या कहा हाईकोर्ट ने?
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा—
जब शिकायतकर्ता स्वयं ही जांच अधिकारियों के निष्कर्षों को चुनौती देने के लिए इच्छुक नहीं है या मामला आगे न चलाने की बात कह चुकी है, तब दंडाधिकारी पुलिस को अपने निष्कर्ष बदलने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी स्थिति में पुलिस रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों पर संदेह करना उचित नहीं था।
⚖️ न्यायालयी हस्तक्षेप की सीमाएं रेखांकित
खंडपीठ ने साफ शब्दों में कहा कि जब—
- शिकायतकर्ता आगे कार्रवाई नहीं चाहती
- पुलिस ने जांच पूरी कर ली हो
- और क्लोजर रिपोर्ट पर कोई आपत्ति न हो
तो अदालत की भूमिका सीमित हो जाती है और दोबारा जांच का आदेश देना न्यायिक प्रक्रिया के दायरे से बाहर होगा।

