अमेरिका ने भारत, चीन समेत कई देशों की व्यापार नीतियों की जांच शुरू कर दी है। 11 मार्च को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने घोषणा की कि 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत नई जांच शुरू की गई है।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए व्यापक टैरिफ को रद्द कर दिया था। अब अमेरिका नई जांच के आधार पर फिर से टैरिफ लगाने पर विचार कर सकता है।
150 दिनों तक लागू रहेगा 10% अस्थायी टैरिफ
ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी को सभी देशों पर 10 प्रतिशत अस्थायी टैरिफ लगाने का फैसला किया था। यह टैरिफ करीब 150 दिनों तक प्रभावी रहेगा।
इस दौरान 15 अप्रैल तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी जाएंगी और नए टैरिफ को लेकर फैसला 5 मई के बाद लिया जा सकता है। इसके लिए सार्वजनिक सुनवाई भी आयोजित की जाएगी।
अमेरिका क्यों कर रहा है यह जांच
इस जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कुछ देशों की व्यापार नीतियां अमेरिकी उद्योगों पर अनुचित दबाव तो नहीं डाल रही हैं।
जांच के दौरान कई प्रमुख पहलुओं की समीक्षा की जाएगी, जैसे—
- बड़े व्यापार सरप्लस
- भारी सरकारी सब्सिडी
- कंपनियों की गैर-व्यावसायिक गतिविधियां
- मजदूरी पर दबाव
- कमजोर पर्यावरण और श्रम मानक
अमेरिका का मानना है कि इन कारणों से वैश्विक बाजार में सस्ते उत्पादों की आपूर्ति बढ़ती है, जिससे अमेरिकी उद्योगों को नुकसान हो सकता है।
किन देशों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
इस जांच में कुल 15 देशों और यूरोपीय संघ के 27 देशों के समूह को शामिल किया गया है।
इन देशों में शामिल हैं—
भारत, चीन, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड, दक्षिण कोरिया, वियतनाम, ताइवान, बांग्लादेश, मेक्सिको और जापान।
भारत के लिए क्यों अहम है यह जांच
भारत के लिए यह जांच खास तौर पर महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कई क्षेत्रों में भारत की उत्पादन क्षमता घरेलू मांग से ज्यादा हो गई है, जिससे निर्यात आधारित अधिशेष बढ़ने की संभावना है।
इन क्षेत्रों में प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- सौर मॉड्यूल
- पेट्रोरसायन
- इस्पात
- वस्त्र उद्योग
- स्वास्थ्य उत्पाद
- निर्माण सामग्री
- वाहन उद्योग
विशेष रूप से भारत की सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता घरेलू मांग से लगभग तीन गुना हो चुकी है।
कई प्रमुख उद्योगों पर होगी नजर
USTR के अनुसार इस जांच में कई अहम उद्योगों को शामिल किया गया है, जिनमें—
- इस्पात
- एल्युमीनियम
- बैटरी
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- रसायन
- मशीनरी
- सेमीकंडक्टर
- सौर मॉड्यूल
जांच के बाद यह तय किया जाएगा कि इन देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित हैं या नहीं।
क्या हो सकता है आगे
अगर जांच में यह पाया जाता है कि कुछ देशों की व्यापार नीतियां अमेरिकी उद्योगों को नुकसान पहुंचा रही हैं, तो अमेरिका उन देशों के उत्पादों पर नए टैरिफ या व्यापार प्रतिबंध लगा सकता है। इससे वैश्विक व्यापार और निर्यात पर असर पड़ने की संभावना है।

