AI आधारित अध्ययन में बड़ा दावा, यात्रा समय 25 मिनट तक घटा; देश का सबसे ऊंचा केबल-स्टे ब्रिज बना आकर्षण
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देश में ईंधन बचत और परिवहन दक्षता बढ़ाने की दिशा में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर शुरू हुए मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट ने बड़ा प्रभाव दिखाना शुरू कर दिया है। एआई आधारित प्रेडिक्टिव इंटेलिजेंस कंपनी Intangles की एक विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार, इस कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने के बाद हर साल लगभग 2.7 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होगी। इससे सालाना करीब 272 करोड़ रुपये की ईंधन लागत कम होने का अनुमान है।
बसों में 24 प्रतिशत तक ईंधन की बचत
रिपोर्ट के मुताबिक, मिसिंग लिंक से होकर गुजरने वाली यात्री बसों की ईंधन खपत में औसतन 24 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई है। वहीं मीडियम कमर्शियल व्हीकल (MCV) ट्रकों की औसत गति में 18 प्रतिशत वृद्धि हुई है। तीन-एक्सल वाहनों ने इस मार्ग को पहले की तुलना में 20 प्रतिशत कम समय में पूरा किया।
विश्लेषण में यह भी सामने आया कि कम ईंधन खपत के कारण हर साल लगभग 64,905 मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) उत्सर्जन को रोका जा सकेगा, जिससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
1,849 कमर्शियल वाहनों और 2,200 ट्रिप्स का अध्ययन
इंटैंगल्स द्वारा किए गए अध्ययन में बसों, एमसीवी ट्रकों, तीन-एक्सल और मल्टी-एक्सल ट्रकों सहित कुल 1,849 यूनिक कमर्शियल वाहनों को ट्रैक किया गया। मुंबई-पुणे कॉरिडोर के घाट सेक्शन में 2,200 से अधिक ट्रिप्स का विश्लेषण किया गया।
वाहनों की गति और यात्रा समय का आकलन GPS तथा जियो-लोकेशन डेटा के आधार पर किया गया, जबकि ईंधन खपत का अनुमान रियल-टाइम ड्राइविंग पैटर्न, सड़क की भौगोलिक स्थिति और वाहन व्यवहार को ध्यान में रखकर विकसित एल्गोरिदम के माध्यम से लगाया गया।
देश का सबसे ऊंचा 180 मीटर का केबल-स्टे ब्रिज
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मुंबई-पुणे मिसिंग लिंक परियोजना का सबसे बड़ा आकर्षण 180 मीटर ऊंचा केबल-स्टे ब्रिज है, जिसे देश का सबसे ऊंचा केबल-स्टे ब्रिज बताया जा रहा है। सह्याद्रि पर्वतमाला के दो दुर्गम पहाड़ों के बीच निर्मित यह पुल अत्याधुनिक इंजीनियरिंग का शानदार उदाहरण है।
इस परियोजना का निर्माण Afcons Infrastructure ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास महामंडल (MSRDC) के माध्यम से किया है।
दुनिया की सबसे चौड़ी रोड टनल भी बनी
मिसिंग लिंक परियोजना में 23.5 मीटर चौड़ी दोहरी सुरंगों का निर्माण भी किया गया है। इन टनलों को दुनिया की सबसे चौड़ी रोड टनल के रूप में मान्यता मिलने का दावा किया गया है। यह परियोजना महाराष्ट्र के बुनियादी ढांचे और परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
6 किलोमीटर कम हुई दूरी, 25 मिनट तक बच रहा समय
मिसिंग लिंक शुरू होने से मुंबई और पुणे के बीच की दूरी लगभग 6 किलोमीटर कम हो गई है। लोनावला-खंडाला घाट के घुमावदार और भीड़भाड़ वाले हिस्से को बायपास करने से वाहन चालकों का 20 से 25 मिनट तक का समय बच रहा है।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर प्रतिदिन 75 हजार से अधिक वाहनों की आवाजाही होती है। ऐसे में यह परियोजना न केवल यात्रा को तेज और सुरक्षित बना रही है, बल्कि ईंधन बचत और प्रदूषण नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभा रही है।

