केंद्र सरकार के फैसले पर विपक्ष का हमला, रोहित पवार बोले- उज्ज्वला के बाद लाडकी बहिन योजना भी हो सकती है सीमित
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को लेकर एक बड़ा बदलाव सामने आया है। आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित परिवारों की महिलाओं को रसोई गैस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई इस योजना में अब सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों की संख्या और कम कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को पूरे वर्ष में केवल चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
गौरतलब है कि योजना की शुरुआत के समय लाभार्थियों को सालाना 12 गैस सिलेंडरों पर सब्सिडी दी जाती थी। बाद में यह संख्या घटाकर 9 कर दी गई थी और अब इसे और कम करते हुए 4 सिलेंडरों तक सीमित कर दिया गया है। इस फैसले का असर देशभर के करोड़ों गरीब परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
रोहित पवार का सरकार पर तीखा हमला
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी कटौती को लेकर एनसीपी (शरद पवार गुट) के विधायक Rohit Pawar ने केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि पहले 12 सिलेंडरों की सीमा घटाकर 9 की गई और अब इसे 4 तक सीमित कर दिया गया है।
रोहित पवार ने कहा कि अगर भविष्य में सरकार उज्ज्वला योजना को पूरी तरह बंद कर दे तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार चुनावी लाभ के लिए योजनाएं शुरू करती है और बाद में धीरे-धीरे उनके दायरे को सीमित कर देती है।
लाडकी बहिन योजना को लेकर भी जताई चिंता
रोहित पवार ने उज्ज्वला योजना के फैसले को महाराष्ट्र की Mukhyamantri Ladki Bahin Yojana से जोड़ते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों के दौरान इस योजना का व्यापक प्रचार किया गया, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद नए नियम और पात्रता शर्तें लागू कर लाखों महिलाओं को योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया।
उनका आरोप है कि भविष्य में और अधिक कड़े मानदंड लागू किए जा सकते हैं, जिससे लाभार्थियों की संख्या और घट सकती है।
80 लाख महिलाओं को बाहर किए जाने का दावा
रोहित पवार ने दावा किया कि नए मापदंड लागू होने के बाद करीब 80 लाख महिलाओं को लाडकी बहिन योजना से बाहर किया गया है। हालांकि सरकार की ओर से इस दावे पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उन्होंने महायुति सरकार पर “विश्वासघात” का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को चुनावी वादों के जरिए आकर्षित किया जाता है और बाद में योजनाओं के स्वरूप में बदलाव कर दिए जाते हैं।
राजनीतिक गलियारों में तेज हुई बहस
उज्ज्वला योजना में सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या घटाए जाने और लाडकी बहिन योजना को लेकर रोहित पवार के बयान के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। विपक्ष इस मुद्दे को आम लोगों और महिलाओं से जुड़े आर्थिक हितों का मामला बताते हुए सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस विषय पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

