चाकण MIDC से 20 कंपनियां समेट सकती हैं कारोबार, 4,000 नौकरियों पर संकट

Thecity news
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खराब सड़कें, गड्ढे और ट्रैफिक जाम से परेशान उद्योगपति; 1,000 करोड़ रुपये के कारोबार पर पड़ सकता है असर

पुणे का चाकण औद्योगिक क्षेत्र, जिसे मर्सिडीज-बेंज, स्कोडा, हुंडई और फॉक्सवैगन जैसी बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए जाना जाता है, इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से जूझ रहा है। खराब सड़कें, जानलेवा गड्ढे और लगातार लगने वाले ट्रैफिक जाम ने यहां के स्थानीय उद्योगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

हालात से परेशान करीब 20 लघु एवं मध्यम उद्यमों ने चाकण से अपना कारोबार समेटने का मन बनाया है। अगर ये कंपनियां यहां से चली जाती हैं तो करीब 1,000 करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है और लगभग 4,000 कर्मचारियों के रोजगार पर भी संकट खड़ा हो सकता है।

चाकण छोड़ने को क्यों मजबूर हुए उद्योगपति?

चाकण MIDC कभी तेजी से उभरते औद्योगिक केंद्र के तौर पर जाना जाता था, लेकिन पिछले कुछ समय से यहां बुनियादी सुविधाओं की कमी गंभीर समस्या बन गई है। सड़कों की हालत खराब है और बारिश के दौरान कीचड़ के कारण आवाजाही और मुश्किल हो जाती है।

घंटों लगने वाले ट्रैफिक जाम की वजह से माल की ढुलाई समय पर नहीं हो पाती, जिससे कंपनियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

दीक्षा एक्सपोर्ट्स के मालिक धनंजय शेडबाले पिछले 19 वर्षों से चाकण में कारोबार कर रहे हैं। उनकी कंपनी में करीब 140 लोग काम करते हैं। उनका कहना है कि वह पिछले 14 महीनों से लगातार MIDC अधिकारियों को खराब सड़कों और ट्रैफिक जाम की समस्या को लेकर पत्र लिख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

सातारा का खंडाला बना नया ठिकाना

लगातार अनदेखी से परेशान इन 20 कंपनियों ने अपना एक समूह बनाया है। फेडरेशन ऑफ चाकण इंडस्ट्रीज के बैनर तले इन कंपनियों ने राज्य सरकार से सातारा जिले के खंडाला MIDC फेज-2 में 17 से 20 एकड़ जमीन की मांग की है।

लघु उद्योग संगठन के अध्यक्ष और मैट्रिक्स टूलिंग्स के मालिक शांतनु कुलकर्णी का कहना है कि छोटी कंपनियों के पास बड़े कॉरपोरेट्स की तरह मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होता। ऐसे में खराब सड़कों और अन्य बुनियादी समस्याओं का सबसे ज्यादा असर इन्हीं पर पड़ता है।

पिछले सात-आठ महीनों से चली लंबी चर्चाओं के बाद कंपनियों ने खंडाला की ओर रुख करने का फैसला लिया है। सरकार को बाकायदा एक प्रस्तुतीकरण सौंपकर प्रस्तावित विस्तार की रूपरेखा भी बताई गई है।

नए प्रोजेक्ट से रोजगार का गणित

सरकार को दिए गए प्रस्ताव के मुताबिक, खंडाला में जमीन मिलने पर एक नया औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा सकता है। प्रस्तावित परियोजना में प्रेस एवं फैब्रिकेशन, प्लास्टिक मोल्डिंग, मशीनिंग, सरफेस कोटिंग, पैकेजिंग और फर्नीचर निर्माण जैसे उद्योग शामिल होंगे।

इनमें ऑटो और गैर-ऑटो क्षेत्र की कंपनियां भी होंगी। अनुमान के मुताबिक, इस स्थानांतरण से करीब 290 करोड़ रुपये का नया निवेश हो सकता है। इससे सरकारी खजाने में हर साल करीब 200 करोड़ रुपये का राजस्व आने का दावा किया गया है।

इसके अलावा सातारा क्षेत्र में 2,000 से 3,000 नए रोजगार पैदा होने का भी अनुमान है। प्रस्तावित उद्योगों का कुल सालाना कारोबार 140 से 150 करोड़ रुपये के बीच रहने का अनुमान लगाया गया है।

स्थानीय अर्थव्यवस्था को लगेगा बड़ा झटका

हालांकि कंपनियों का खंडाला जाना सातारा के लिए औद्योगिक विकास के नए अवसर खोल सकता है, लेकिन चाकण के लिए यह बड़ा आर्थिक नुकसान साबित हो सकता है।

इन लघु उद्योगों से जुड़े ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार और स्थानीय दुकानदार भी प्रभावित होंगे। 12 अगस्त को इस मुद्दे पर फेडरेशन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। इसमें स्थानीय मजदूर यूनियन और ट्रक-टेंपो चालक यूनियन भी शामिल होकर अपनी समस्याएं रखेंगे।

अगर प्रशासन समय रहते सड़क, यातायात और अन्य बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं करता है, तो चाकण का औद्योगिक संकट स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल सकता है।

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