एनडीबी वेल्थ मैनेजमेंट की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और एशियाई निवेशकों की मांग अगले 12 से 24 महीनों में सोने की कीमतों को सहारा दे सकती है।
मिडिल ईस्ट में तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच सोने की कीमतों को लेकर एक अहम रिपोर्ट सामने आई है। एनडीबी वेल्थ मैनेजमेंट के मुताबिक, अगले 12 से 24 महीनों में सोने की कीमत 4,200 से 5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के बीच रह सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और एशियाई निवेशकों की मजबूत मांग सोने की कीमतों को सहारा दे रही है। इसके चलते अमेरिकी ब्याज दरों में बदलाव का असर पहले की तुलना में कम हो सकता है।
उतार-चढ़ाव के बावजूद सोने में मजबूती
रिपोर्ट तैयार किए जाने के समय सोना 4,118.91 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था। इसमें 5.82 डॉलर यानी 0.14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि ऊंची अमेरिकी ब्याज दरों, लगातार बनी महंगाई और मजबूत डॉलर जैसी परिस्थितियों के बावजूद सोने की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। आमतौर पर ये कारक सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं।
केंद्रीय बैंकों और एशियाई निवेशकों की बढ़ी भूमिका
एनडीबी वेल्थ मैनेजमेंट के मुताबिक, सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाले कारकों में बदलाव आया है। अब बाजार की चाल केवल अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसलों पर निर्भर नहीं है। केंद्रीय बैंक और एशियाई निवेशक ऊंची कीमतों पर भी सोने की खरीदारी जारी रखे हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंकों ने 2026 की दूसरी तिमाही में 289 टन सोना खरीदा। वहीं, साल की पहली छमाही में एशियाई गोल्ड फंडों में करीब 70 टन सोने का शुद्ध निवेश आया। रिपोर्ट में इसे पहली छमाही का अब तक का सबसे मजबूत प्रदर्शन बताया गया है।
डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए सोना खरीद रहे केंद्रीय बैंक
इसके विपरीत, इसी अवधि में उत्तरी अमेरिकी गोल्ड फंडों से करीब 61 टन सोने की निकासी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी रियल यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती ने पश्चिमी देशों में निवेश की मांग को प्रभावित किया।
एनडीबी वेल्थ का कहना है कि केंद्रीय बैंक अपने भंडार में विविधता लाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए सोना खरीद रहे हैं। उनका उद्देश्य केवल कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से मुनाफा कमाना नहीं है। रिपोर्ट को उम्मीद है कि सरकारी क्षेत्र की ओर से सोने की खरीदारी मजबूत बनी रहेगी।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुमान के मुताबिक, 2026 में केंद्रीय बैंक करीब 850 टन सोना खरीद सकते हैं। यह 2025 में दर्ज 863 टन की खरीद के लगभग बराबर होगा।
सीमित आपूर्ति भी कीमतों को दे रही सहारा
सोने की कीमतों को सहारा देने वाला एक अन्य कारक इसकी सीमित आपूर्ति है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में दुनिया भर की खदानों से सोने का उत्पादन 2.4 प्रतिशत बढ़कर 3,907 टन रहने का अनुमान है।
खनन की बढ़ती लागत और नई खदानों को विकसित करने में लगने वाले लंबे समय के कारण उत्पादन में तेजी से बढ़ोतरी करना मुश्किल होता है। ऐसे में मांग बढ़ने पर आपूर्ति का सीमित रहना कीमतों को सहारा दे सकता है।
किन परिस्थितियों में गिर सकती हैं कीमतें?
रिपोर्ट के मुताबिक, अगले 12 से 24 महीनों में सोने की कीमत 4,200 से 5,000 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के दायरे में रह सकती है। हालांकि, यह अनुमान है, कीमतों की गारंटी नहीं।
खाड़ी क्षेत्र में स्थायी शांति, महंगाई में कमी और अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी रुकने जैसी परिस्थितियां सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकती हैं। इसलिए निवेशकों के लिए वैश्विक घटनाक्रम, ब्याज दरों और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी पर नजर रखना अहम रहेगा।

