बजट पेश होने से पहले सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर प्रश्न, मरीजों को निजी मेडिकल से खरीदनी पड़ रहीं महंगी दवाएं
मुंबई: Brihanmumbai Municipal Corporation (बीएमसी) आज अपना बजट पेश करने जा रही है, लेकिन इससे पहले शहर की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2023 में बीएमसी ने ‘जीरो-प्रिस्क्रिप्शन पॉलिसी’ लागू करने की घोषणा की थी, जिसके तहत मरीजों को अस्पताल से ही सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध कराने का वादा किया गया था। हालांकि मौजूदा हालात इस नीति के क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।
16 से अधिक अस्पतालों में दवाओं की कमी
बीएमसी द्वारा संचालित परिधीय अस्पतालों में आवश्यक दवाओं और चिकित्सा सामग्री की भारी कमी सामने आई है। शहर के 16 से अधिक अस्पतालों में दर्द निवारक, एंटासिड, सलाइन, सिरिंज और एंटीबायोटिक जैसी बुनियादी दवाएं अस्पताल की फार्मेसी से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
मरीजों और उनके परिजनों को मजबूरन निजी मेडिकल दुकानों से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। कई अस्पतालों में फार्मेसी काउंटर सीमित समय के लिए ही खुलते हैं या शाम के बाद बंद हो जाते हैं। फार्मासिस्टों की कमी के कारण भी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
गरीब और मध्यम वर्ग पर बढ़ा आर्थिक बोझ
यह स्थिति विशेष रूप से गरीब और मध्यम वर्गीय मरीजों के लिए चिंता का विषय है, जो पूरी तरह सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं। दवाओं की अनुपलब्धता के कारण उपचार में देरी हो रही है और मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, दवाओं की कमी के पीछे बीएमसी की केंद्रीय खरीद प्रक्रिया में देरी एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। ऐसे में बजट से पहले स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और दवा आपूर्ति को सुचारू बनाने की मांग तेज हो गई है।

