धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: उपलब्धियों और विवादों के बीच खत्म हुआ शिक्षा मंत्री का कार्यकाल

Thecity news
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देशभर में NEET पेपर लीक मामले को लेकर बढ़ते राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले की नैतिक जिम्मेदारी पहले दिन से स्वीकार कर रहे थे। उनके इस्तीफे के साथ ही शिक्षा क्षेत्र में उनके कार्यकाल की उपलब्धियां और विवाद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।

देशभर में जारी NEET पेपर लीक मामले और लगातार बढ़ रहे विरोध के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। पिछले एक महीने से अधिक समय से विभिन्न छात्र संगठन उनके इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के समर्थन में अनशन किया था।

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधार लागू किए गए, वहीं कई विवादों ने भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया।

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियां

CUET के जरिए एकीकृत प्रवेश प्रक्रिया

देशभर के केंद्रीय और प्रमुख विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और एक समान बनाने के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) की शुरुआत की गई।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नई NCERT किताबें

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों को तैयार किया गया। पुस्तकों की छपाई क्षमता बढ़ाकर तीन गुना करने से उनकी उपलब्धता बढ़ी और कीमतों में भी कमी आई।

विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी

उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से 19 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर स्थापित करने की अनुमति दी गई।

उच्च शिक्षा के लिए एकल नियामक की पहल

उच्च शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई जैसी संस्थाओं को एकीकृत करने के उद्देश्य से ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पेश किया गया।

उच्च शिक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC), चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP), डिजिटल लर्निंग और स्किल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

कार्यकाल के दौरान जुड़े प्रमुख विवाद

NEET-UG 2024 परीक्षा विवाद

NEET-UG 2024 पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों के कारण विवादों में रही। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए।

NEET-UG 2026 पेपर लीक

NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक की घटनाओं ने लाखों अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी। इस मुद्दे को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार पर जवाबदेही का दबाव बढ़ा।

डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल

सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा में पहली बार लागू की गई ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली तकनीकी समस्याओं और धुंधली उत्तर पुस्तिकाओं के कारण विवादों में रही।

त्रिभाषा नीति का विरोध

कक्षा 9 में त्रिभाषा नीति लागू किए जाने पर तमिलनाडु समेत कई गैर-हिंदी भाषी राज्यों ने इसका विरोध किया और केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने के आरोप लगाए।

UGC Equity Regulations 2026 पर विवाद

उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता से जुड़े UGC Equity Regulations 2026 को लेकर शिक्षा जगत और विभिन्न सामाजिक संगठनों की ओर से व्यापक विरोध देखने को मिला।

धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधारों और महत्वपूर्ण नीतिगत बदलावों के लिए याद किया जाएगा, वहीं राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अनियमितताओं और कई विवादों ने भी उनके कार्यकाल को लगातार चर्चा में बनाए रखा।

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