डीएमके का बड़ा फैसला, ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव का समर्थन करेगी पार्टी; बोली- आईएनडीआईए का हिस्सा नहीं

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डीएमके प्रवक्ता टीकेएस इलंगोवन ने कहा कि पार्टी संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रस्ताव का समर्थन करेगी, लेकिन विपक्षी गठबंधन का हिस्सा नहीं है।

चेन्नई, 30 सितंबर।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम यानी डीएमके ने मंगलवार को कहा कि वह संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष की ओर से लाए जाने वाले प्रस्ताव का समर्थन करेगी। हालांकि, पार्टी ने स्पष्ट किया कि वह आईएनडीआईए गठबंधन का हिस्सा नहीं है।

डीएमके प्रवक्ता टीकेएस इलंगोवन ने कहा कि वैचारिक रूप से कई विपक्षी दल अलग-अलग मुद्दों पर एक साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि जब भी विपक्ष किसी मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी का विरोध करेगा, डीएमके भी उसके साथ खड़ी होगी।

‘हम आईएनडीआईए गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं’

इलंगोवन ने कहा कि विपक्षी दलों के कई मुद्दों पर समान रुख होने का मतलब यह नहीं है कि डीएमके आईएनडीआईए गठबंधन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अगर संसद में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए कोई प्रस्ताव लाया जाता है तो डीएमके उसका समर्थन करेगी।

उनका यह बयान 30 सितंबर को होने वाली विपक्षी दलों की बैठक से पहले आया है। इस बैठक में ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा होनी है।

स्टालिन पहले ही कर चुके हैं ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग

डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन ने 23 सितंबर को ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाने की मांग की थी। उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया रोकने और चुनाव आयोग से जुड़े घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच की मांग भी की थी।

स्टालिन ने उस समय कहा था कि डीएमके और अन्य विपक्षी दल एसआईआर के तहत मतदाता सूची में बदलाव को लेकर पहले से आपत्ति जताते रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सामने आई रिपोर्टों के आधार पर भी सवाल उठाए थे। ये उनके राजनीतिक आरोप और मांगें हैं।

कांग्रेस से दूरी को लेकर भी बोले इलंगोवन

इलंगोवन ने कांग्रेस के साथ डीएमके के संबंधों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने तमिलनाडु में टीवीके का समर्थन करने का फैसला किया है और इसी वजह से डीएमके उसके द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल नहीं होगी।

उन्होंने यह भी कहा कि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के बैठक में शामिल नहीं होने को लेकर भी कांग्रेस की भूमिका है। हालांकि, ये इलंगोवन के आरोप हैं। डीएमके मंगलवार को 30 सितंबर की आईएनडीआईए बैठक में शामिल नहीं होने की बात पहले ही कह चुकी थी।

डीएमके का कहना है कि ज्ञानेश कुमार को हटाने के प्रस्ताव का समर्थन करना आईएनडीआईए गठबंधन में दोबारा शामिल होने का संकेत नहीं माना जाना चाहिए। पार्टी इस मुद्दे पर अपने नेता एमके स्टालिन के पहले दिए गए रुख के अनुरूप समर्थन करने की बात कह रही है।

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