कामकाजी पेशेवरों के लिए शुरू हुए इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम में एआई सिस्टम पर होने वाले साइबर हमलों और उनसे बचाव की ट्रेनिंग दी जाएगी।
अगर आप नौकरी के साथ साइबर सिक्योरिटी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली ने कामकाजी पेशेवरों के लिए साइबर सिक्योरिटी और एआई सिक्योरिटी में छह महीने का सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू किया है। यह कोर्स संस्थान के कंटिन्यूइंग एजुकेशन प्रोग्राम (सीईपी) के तहत संचालित होगा।
एआई के बढ़ते इस्तेमाल के बीच कंपनियों और संस्थानों के सामने साइबर सुरक्षा की नई चुनौतियां आ रही हैं। इसी को ध्यान में रखकर यह प्रोग्राम तैयार किया गया है।
कोर्स में क्या सिखाया जाएगा?
इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम का उद्देश्य एआई सिस्टम पर होने वाले साइबर हमलों को समझना और उनसे बचाव के तरीके सिखाना है। इसमें एडवर्सरियल मशीन लर्निंग, लार्ज लैंग्वेज मॉडल (एलएलएम) प्रॉम्प्ट इंजेक्शन, एजेंटिक एआई के दुरुपयोग और मॉडल सप्लाई चेन अटैक जैसे विषय शामिल हैं।
कोर्स में एजेंटिक एआई से जुड़े पांच प्रमुख साइबर हमलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इनमें मल्टीमॉडल जेलब्रेक, मॉडल कॉन्टेक्स्ट प्रोटोकॉल (एमसीपी) प्रॉम्प्ट इंजेक्शन, मेमोरी पॉइजनिंग, टूल-कॉलिंग एक्सप्लॉइटेशन और मॉडल हब सप्लाई चेन अटैक शामिल हैं।
78 घंटे की ऑनलाइन पढ़ाई और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग
इस प्रोग्राम में कुल 78 घंटे की लाइव ऑनलाइन पढ़ाई होगी। पाठ्यक्रम को पांच मॉड्यूल में बांटा गया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रतिभागियों को एक कैपस्टोन प्रोजेक्ट भी तैयार करना होगा।
प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के दौरान PyRIT, Garak, Sigstore, OPA और Falco जैसे टूल्स और फ्रेमवर्क का इस्तेमाल करना सिखाया जाएगा।
हर शनिवार को होंगी ऑनलाइन कक्षाएं
इस कोर्स की कक्षाएं हर शनिवार को ऑनलाइन आयोजित की जाएंगी। इन्हें आईआईटी दिल्ली के फैकल्टी सदस्य और इंडस्ट्री विशेषज्ञ पढ़ाएंगे।
कैपस्टोन प्रोजेक्ट के तहत प्रतिभागियों को एआई सिक्योरिटी से जुड़ा प्रोडक्शन-ग्रेड समाधान तैयार करके लागू करना होगा। इस प्रोजेक्ट का मूल्यांकन आईआईटी दिल्ली के फैकल्टी सदस्य करेंगे।
कौन कर सकता है आवेदन?
यह प्रोग्राम साइबर सिक्योरिटी प्रोफेशनल्स, एआई और मशीन लर्निंग इंजीनियर्स, डेटा साइंटिस्ट, डेवऑप्स और प्लेटफॉर्म इंजीनियर्स के साथ गवर्नेंस, रिस्क एंड कंप्लायंस (जीआरसी) से जुड़े पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है।
आवेदन के लिए उम्मीदवार के पास इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, गणित, सांख्यिकी या संबंधित विषय में बैचलर या मास्टर डिग्री होनी चाहिए। डिग्री में कम से कम 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। इसके अलावा उम्मीदवार को कम से कम एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज की जानकारी होनी चाहिए।
कितनी है कोर्स की फीस?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, छह महीने के इस सर्टिफिकेट प्रोग्राम की फीस करीब 1,40,000 रुपये है। इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी अलग से देना होगा। जीएसटी सहित कुल फीस 1,65,200 रुपये हो जाती है।
फीस की रसीद आईआईटी दिल्ली के सीईपी की ओर से जारी की जाएगी, जिसे सीईपी पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा। आवेदन से पहले उम्मीदवारों को आधिकारिक माध्यम से फीस और किस्तों से जुड़ी नवीनतम जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए।
कोर्स पूरा करने पर मिलेगा डिजिटल सर्टिफिकेट
प्रोग्राम सफलतापूर्वक पूरा करने वाले उम्मीदवारों को सीईपी-आईआईटी दिल्ली की ओर से डिजिटल रूप से सत्यापित ई-सर्टिफिकेट ऑफ कम्प्लीशन दिया जाएगा।

