महाराष्ट्र बजट 2026: ‘लखपति दीदी’ पर बड़ा जोर, 2026-27 में 25 लाख और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य

Thecity news
3 Min Read

लाड़ली बहन योजना की राशि नहीं बढ़ी, लेकिन महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर सरकार का फोकस

महाराष्ट्र के बजट में इस बार उम्मीद की जा रही थी कि ‘लाड़ली बहन’ योजना की राशि बढ़ाकर 2,100 रुपये कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हालांकि Devendra Fadnavis सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ग्रामीण आजीविका उत्थान मिशन और ‘लखपति दीदी’ योजना पर खास जोर दिया है।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बजट पेश करते हुए बताया कि मिशन के तहत अब तक लगभग 37 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है। सरकार ने वर्ष 2026-27 में 25 लाख और महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य तय किया है।

13 जिलों में बनेंगे ‘उम्मीद मॉल’

महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने एक नई पहल की घोषणा की है। महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण आजीविका सुधार मिशन के तहत पहले चरण में 13 जिलों में ‘उम्मीद मॉल जिला बिक्री केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे।

यह पहल केंद्र सरकार की ‘शी मॉल’ योजना के तहत होगी, जहां स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए सभी उत्पादों की बिक्री होगी। इन मॉल का संचालन भी महिलाएं ही करेंगी और इससे होने वाली आय सीधे महिला समूहों को मिलेगी।

अकेली महिलाओं के लिए बनेगी नई नीति

मुख्यमंत्री ने राज्य की अकेली महिलाओं के कल्याण के लिए भी नई पहल की घोषणा की है। उन्होंने बताया कि फिलहाल राज्य के सभी जिलों में अकेली महिलाओं का सर्वेक्षण किया जा रहा है। सर्वे पूरा होने के बाद उसके आधार पर एक व्यापक विश्लेषण किया जाएगा और अकेली महिलाओं के लिए विशेष कल्याण नीति लाई जाएगी।

‘लखपति दीदी’ योजना से महिलाओं को रोजगार

ग्रामीण आजीविका उत्थान मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को छोटे-छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए सहायता दी जाती है, जिससे उन्हें हर साल कम से कम 1 लाख रुपये तक की नियमित आय हो सके।

इस योजना के तहत महिलाओं को सिलाई, प्लंबिंग, एलईडी बल्ब निर्माण से लेकर ड्रोन संचालन तक की ट्रेनिंग दी जाती है। ‘लखपति दीदी’ योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें नए अवसर प्रदान करना है।

महिलाओं के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और ‘भरोसा’ सेल

महिलाओं के खिलाफ अपराध और कार्यस्थल पर उत्पीड़न से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए राज्य में फास्ट-ट्रैक कोर्ट और ‘भरोसा’ सेल बनाए गए हैं। इसके साथ ही सरकारी और निजी संस्थानों में 1.19 लाख से अधिक शिकायत निवारण समितियां बनाई गई हैं।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में महाराष्ट्र में महिलाओं के खिलाफ 50,350 मामले दर्ज हुए, जबकि 2024 में 46,320 और 2023 में 47,029 मामले सामने आए थे। सरकार का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा और समर्थन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *