विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने दिया जवाब, कहा— महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की क्षमता रखती है
महाराष्ट्र विधानसभा में बजट पर चल रही चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने राज्य पर बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि महाराष्ट्र की आर्थिक स्थिति मजबूत है और राज्य को कर्ज के जाल में फंसा हुआ बताना पूरी तरह गलत है।
उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों की तुलना में महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था काफी बड़ी है। मुख्यमंत्री का दावा है कि यदि महाराष्ट्र को एक स्वतंत्र देश माना जाए, तो उसकी अर्थव्यवस्था दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में लगभग 30वें स्थान पर होगी। उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था Australia और Thailand जैसे देशों से भी बड़ी है।
विधायक के उदाहरण से समझाया कर्ज का मुद्दा
विधानसभा में Sunil Prabhu ने अपने भाषण के दौरान राज्य के बढ़ते कर्ज का मुद्दा उठाया था। इसके जवाब में मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रभु के चुनावी हलफनामे का उदाहरण देते हुए कर्ज की स्थिति को समझाने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुनील प्रभु की कुल संपत्ति लगभग 14 करोड़ रुपये है, जबकि उन पर 3.54 करोड़ रुपये का कर्ज है। इस हिसाब से उनकी कुल देनदारी करीब 25.28 प्रतिशत बनती है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या इतनी देनदारी के आधार पर किसी व्यक्ति को कर्ज में डूबा हुआ या दिवालिया कहा जा सकता है?
महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था लगातार हो रही मजबूत
मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी तरह महाराष्ट्र को भी कर्ज में डूबा हुआ बताना सही नहीं है। उनके अनुसार वर्तमान में राज्य पर लगभग 18 प्रतिशत कर्ज का बोझ है, जो आर्थिक मानकों के अनुसार संतुलित और नियंत्रित है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास की गति बनाए रखते हुए वित्तीय अनुशासन का पालन कर रही है और महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है।
कई देशों से बड़ी है महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था कई देशों से बड़ी हो चुकी है। इनमें Austria, Thailand, Palestine, Norway, Vietnam और Bangladesh जैसे देश शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि यह राज्य की आर्थिक क्षमता और औद्योगिक विकास को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार राज्य का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) वर्ष 2013-14 में लगभग 16 लाख करोड़ रुपये था, जो पिछले दस वर्षों में बढ़कर करीब 51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यानी एक दशक में महाराष्ट्र की अर्थव्यवस्था लगभग तीन गुना बढ़ी है।

