12 हजार किसान मुंबई की ओर रवाना, सरकार के सामने रखेंगे अपनी मांगें

Thecity news
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अकोले से शुरू हुए वाहन लॉन्ग मार्च में 20 से अधिक जिलों के किसान, खेत मजदूर और ग्रामीण कामगार शामिल; कर्जमाफी और मुआवजे की मांग।

महाराष्ट्र में किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण कामगारों की मांगों को लेकर आंदोलन तेज हो गया है। अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में सोमवार को अकोले से मुंबई तक वाहन लॉन्ग मार्च शुरू हुआ। किसान सभा के मुताबिक, 20 से अधिक जिलों के 12 हजार से ज्यादा किसान एक हजार से अधिक वाहनों के साथ मुंबई की ओर रवाना हुए हैं। आंदोलनकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के सरकारी आवास वर्षा बंगले तक पहुंचकर अपनी मांगें रखेंगे।

मार्च शुरू होने से पहले अकोले में लाल झंडों के साथ पैदल मार्च निकाला गया। इसमें किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विजू कृष्णन, राष्ट्रीय सहसचिव डॉ. अजित नवले, माकपा विधायक विनोद निकोले और संगठन के अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। नासिक जिले से आया वाहनों का काफिला भी घोटी में मुख्य मार्च से जुड़ गया।

किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

किसान सभा ने राज्य के 358 में से 305 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किए जाने का हवाला देते हुए प्रति किसान परिवार घोषित 5,000 रुपये की सहायता को अपर्याप्त बताया है। संगठन ने फसल नुकसान का पर्याप्त मुआवजा देने और फसल बीमा भुगतान से जुड़ी बाधाओं को दूर करने की मांग की है।

इसके अलावा, दो लाख रुपये की कर्जमाफी का लाभ नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को भी देने की मांग उठाई गई है। किसान सभा चाहती है कि वन भूमि, देवस्थान ट्रस्ट, इनाम और चरागाह की जमीन पर खेती करने वाले किसानों के भूमि अधिकार भी दर्ज किए जाएं।

आशा और आंगनवाड़ी कर्मचारी भी शामिल

इस लॉन्ग मार्च में पेसा कर्मचारी, निर्माण मजदूर, पोषण आहार कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कर्मचारी भी शामिल हैं। संगठन ने ग्रामीण मजदूरों के लिए उचित वेतन, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ सरकारी योजनाओं से जुड़े कर्मचारियों की लंबित मांगों को हल करने की अपील की है।

किसान सभा ने नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना की दो लंबित किस्तें किसानों के खातों में जमा करने की भी मांग की है। इसके साथ ही संगठन का दावा है कि ई-केवाईसी के कारण लाडकी बहिण योजना से बाहर हुईं 81 लाख महिलाओं को दोबारा योजना में शामिल किया जाए, उनका बकाया मानधन दिया जाए और ई-केवाईसी की प्रक्रिया फिर शुरू की जाए।

नोटिस के बावजूद आंदोलन जारी रखने का ऐलान

किसान सभा के अनुसार, मांगों को लेकर 21 से 26 अक्टूबर तक अकोले में महा-मुक्काम सत्याग्रह किया गया था। संगठन का आरोप है कि सरकार ने मांगों पर सकारात्मक चर्चा करने के बजाय आंदोलनकारियों को पुलिस के माध्यम से नोटिस जारी किए और उन्हें वर्षा बंगले तक जाने से रोकने का प्रयास किया।

किसान सभा ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार के सामने रखना जनता का अधिकार है। संगठन ने मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा कर सभी मांगों पर ठोस निर्णय लेने और उन्हें लिखित रूप में स्वीकार करने की अपील की है।

घाटणदेवी में पड़ाव, फिर मुंबई की ओर कूच

आयोजकों के मुताबिक, मार्च सोमवार रात इगतपुरी के पास घाटणदेवी में पड़ाव डालेगा। मंगलवार सुबह आंदोलनकारी कसारा घाट से होते हुए मुंबई की ओर आगे बढ़ेंगे।

किसान सभा ने स्पष्ट किया है कि मांगें लिखित रूप में मंजूर होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अब नजर इस बात पर है कि सरकार आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत कर उनकी मांगों पर क्या निर्णय लेती है।

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