मुंबई: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण आंदोलन को लेकर चल रही शांतिपूर्ण बातचीत अचानक एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। अब तक सरकार के कुछ फैसलों और आश्वासनों से संतुष्ट दिखाई दे रहे आंदोलनकारी एक बार फिर आक्रामक रुख अपनाते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे रमेश केरे पाटिल और उनके समर्थकों ने मंगलवार सुबह मराठा उप-समिति के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल के मुंबई स्थित सरकारी बंगले में प्रवेश कर वहां धरना शुरू कर दिया।
सरकार पर भरोसा टूटने का आरोप, सौंपा मांगपत्र
प्रदर्शनकारियों ने मंत्री विखे पाटिल को अपनी मांगों से जुड़ा विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि सरकार के आश्वासनों पर अब भरोसा करना मुश्किल हो गया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार मराठा समाज के साथ छल कर रही है और लंबे समय से लंबित मांगों पर केवल समय बिताने की नीति अपना रही है।
कुनबी प्रमाणपत्र के नए नियमों से बढ़ा विवाद
आंदोलन के उग्र होने की मुख्य वजह हाल ही में जारी किया गया सरकारी आदेश (GR) बताया जा रहा है। रमेश केरे पाटिल ने आरोप लगाया कि सरकार ने केवल उन मराठाओं को कुनबी प्रमाणपत्र देने का प्रावधान किया है, जिनके पास वर्ष 1967 से पहले के कुनबी रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि जब मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल और विधायक प्रसाद लाड ने मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल समाप्त करवाई थी, तब मराठा समाज को उम्मीद थी कि आरक्षण के मुद्दे पर न्याय मिलेगा। लेकिन नए नियमों के कारण मराठवाड़ा क्षेत्र के अधिकांश मराठा परिवारों को कुनबी प्रमाणपत्र नहीं मिल पाएगा। आंदोलनकारियों का दावा है कि यह फैसला समुदाय की अपेक्षाओं के विपरीत है और इससे बड़ी संख्या में मराठा युवाओं को आरक्षण लाभ से वंचित होना पड़ सकता है।
मनोज जरांगे की मांगों पर फैसले में देरी से नाराजगी
धरने पर बैठे कार्यकर्ताओं ने राज्य सरकार पर मनोज जरांगे पाटिल की प्रमुख मांगों को लेकर निर्णय प्रक्रिया में देरी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि भूख हड़ताल समाप्त हुए काफी समय बीत चुका है, लेकिन सरकार अब तक कोई स्थायी और ठोस निर्णय नहीं ले सकी है।
आंदोलनकारियों के अनुसार, कैबिनेट स्तर पर लगातार चर्चा के बावजूद जमीनी स्तर पर मराठा समाज के छात्रों, युवाओं और बेरोजगारों को कोई ठोस लाभ नहीं मिल रहा है। उनका आरोप है कि सरकार केवल कागजी घोषणाओं तक सीमित है और वास्तविक समाधान देने में विफल रही है।
गिरगांव चौपाटी पर जल विसर्जन आंदोलन की तैयारी
इधर मुंबई के गिरगांव चौपाटी क्षेत्र में भी मराठा संगठनों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ‘मराठा क्रांति ठोक मोर्चा’ ने अरब सागर में जल विसर्जन आंदोलन का आह्वान किया था। संगठन का कहना है कि वर्षों बीत जाने के बावजूद छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रस्तावित भव्य समुद्री प्रतिमा का निर्माण पूरा नहीं हो सका है, जिसके विरोध में यह आंदोलन आयोजित किया जा रहा था।
मुंबई पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा
कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुंबई पुलिस ने विखे पाटिल के बंगले और गिरगांव चौपाटी सहित कई संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस ने एहतियातन मराठा क्रांति ठोक मोर्चा के कई प्रमुख कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
मराठा आंदोलन के नए चरण से सरकार पर दबाव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मराठा आरक्षण आंदोलन का यह नया चरण राज्य सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है। यदि आंदोलन और तेज होता है तो आगामी दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति और सामाजिक समीकरणों पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

