मिडिल ईस्ट युद्ध का असर: भारतीय बंदरगाहों पर 23,000 कंटेनर फंसे, निर्यात-आयात और किसानों पर बढ़ा संकट

Thecity news
4 Min Read

इजरायल-ईरान तनाव से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित, JNPT और मुंद्रा पोर्ट पर लॉजिस्टिक जाम

मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक व्यापार मार्गों को गहराई से प्रभावित किया है, खासकर Strait of Hormuz और Persian Gulf से गुजरने वाली सप्लाई चेन पर। इसका असर अब सीधे भारत के पश्चिमी तटीय बंदरगाहों पर दिखाई दे रहा है।

Jawaharlal Nehru Port Trust और Mundra Port जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर लॉजिस्टिक जाम गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है, जहां हजारों कंटेनर फंसे हुए हैं।

मुख्य शिपिंग कंपनियों ने युद्ध की अनिश्चितता के कारण नई बुकिंग रोक दी है और कई जहाजों को लंबी दूरी वाले रूट जैसे Cape of Good Hope की ओर मोड़ दिया है। इसके चलते भारत से मिडिल ईस्ट जाने वाले हजारों कंटेनर बंदरगाहों पर अटक गए हैं।

भारत से मिडिल ईस्ट जाने वाले निर्यात पर असर

इस संकट का सबसे ज्यादा असर कृषि निर्यात पर पड़ा है। वर्तमान में बंदरगाहों पर फंसे निर्यात का अनुमान इस प्रकार है:

  • बासमती चावल: करीब 4 लाख टन (2 लाख टन भारतीय बंदरगाहों पर, 2 लाख टन ट्रांज़िट में)
  • ताजा अंगूर: 5,000–6,000 टन (300+ कंटेनर)
  • प्याज: 5,400 टन (150–200 कंटेनर, मुख्यतः नासिक से)
  • केला और अनार: सैकड़ों टन (1,000+ रीफर यूनिट्स में)
  • फ्रोजन बफेलो मीट: बड़ी मात्रा (300+ पेरिशेबल कंटेनर)
  • कुल मिडिल ईस्ट जाने वाले कंटेनर: लगभग 23,000 यूनिट्स विभिन्न पश्चिमी बंदरगाहों पर फंसे

निर्यात रुकने के कारण थोक बाजारों में ‘रिवर्स-फ्लो क्राइसिस’ की स्थिति बन गई है। Vashi APMC Market जैसे बड़े बाजारों में अतिरिक्त माल पहुंचने से कीमतें गिर रही हैं। उदाहरण के लिए, केला ₹25 प्रति किलो से घटकर ₹15 प्रति किलो तक आ गया है।

आयात और उद्योग पर भी पड़ा असर

निर्यात के साथ-साथ आयात भी प्रभावित हुआ है। कई महत्वपूर्ण कच्चे माल और ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई में देरी हो रही है।

  • सल्फर और जिप्सम: लगभग 3 लाख टन शिपमेंट देरी में
  • ड्राई फ्रूट्स और खजूर: 600–700 कंटेनर Bandar Abbas जैसे हब पर फंसे
  • LPG: 5 बड़े कैरियर जहाजों को मोड़ा या पोस्टपोन किया गया

ऊर्जा सुरक्षा भी चिंता का विषय बन गई है क्योंकि भारत के करीब 85% LPG और 55% LNG आयात इसी होर्मुज रूट पर निर्भर हैं। इससे घरेलू गैस कीमतों और उद्योगों की लागत बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है।

आर्थिक और लॉजिस्टिक दबाव बढ़ा

Jawaharlal Nehru Port Trust पर ही 5,000 से ज्यादा कंटेनर ग्राउंडेड हैं। इन कंटेनरों की स्टोरेज और बिजली चार्जेस लगभग ₹8,500 प्रति कंटेनर प्रतिदिन तक पहुंच गए हैं।

वहीं, थोक बाजारों में अतिरिक्त स्टॉक आने से किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर Israel और Iran के बीच संघर्ष लंबा चलता है, तो इसका असर भारत के कृषि निर्यात, औद्योगिक उत्पादन, ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू कीमतों पर लंबे समय तक पड़ सकता है।

Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *