वीआईपी प्रमुख ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनाव प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए, एसआईआर से जुड़े फैसलों पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों की रिपोर्ट का भी किया जिक्र; चुनाव आयोग ने फैसलों को सर्वसम्मति से लिए जाने की बात कही
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के प्रमुख मुकेश सहनी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर एक विवादित बयान दिया है। पटना में पत्रकारों से बातचीत के दौरान सहनी ने कहा कि अगर उन्हें एक हत्या की माफी होती तो वह ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते। हालांकि, उन्होंने साथ ही कहा कि वह संविधान को मानने वाले लोग हैं।
सहनी ने चुनाव आयोग पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि आने वाले समय में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई होगी और 2029 में राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनने पर उन्हें जेल भेजा जाएगा। ये बातें सहनी के राजनीतिक दावे और बयान हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
‘एक खून माफ होता तो ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते’
मुकेश सहनी ने कहा कि चुनाव आयोग अब भाजपा का आयोग बन चुका है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को संबोधित करते हुए कहा कि समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता और संविधान के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
सहनी ने इसी दौरान कहा कि अगर उन्हें एक खून माफ होता तो वह सबसे पहले ज्ञानेश कुमार को गोली मार देते। इसके बाद उन्होंने कहा कि वे संविधान को मानने वाले लोग हैं।
सहनी ने बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में 27 लाख वोट काटे गए और बिहार में लोगों के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजकर चुनाव को प्रभावित किया गया। ये दावे सहनी के बयान के तौर पर ही सामने आए हैं।
2029 को लेकर भी किया बड़ा दावा
वीआईपी प्रमुख ने कहा कि आने वाले समय में ज्ञानेश कुमार को छोड़ा नहीं जाएगा। उन्होंने दावा किया कि 2029 में राहुल गांधी के नेतृत्व में सरकार बनेगी और ज्ञानेश कुमार जेल जाने वाले पहले लोगों में होंगे।
उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर चुनाव के जरिए ही जनादेश को प्रभावित किया जाना है तो चुनाव कराने का क्या मतलब है। सहनी ने मतदाता और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर लोगों से इन मामलों को समझने की अपील भी की।
एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के अंदर आपत्तियों की रिपोर्ट
सहनी का बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े कुछ मुद्दों पर चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को लेकर रिपोर्ट सामने आई है।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता डेटाबेस और एसआईआर से जुड़े प्रक्रियात्मक मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ आपत्तियों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने फैसलों को उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना जारी किए जाने पर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग ने दी अलग सफाई
वहीं, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन रिपोर्टों के बाद कहा कि एसआईआर समेत आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग के मुताबिक, विचार-विमर्श के दौरान उठाए गए सवाल, सुझाव या व्यक्तिगत टिप्पणियां अपने आप में आयोग के अलग या असहमति वाले फैसले नहीं माने जा सकते।
24 सितंबर को आयोग ने यह भी कहा कि एसआईआर से जुड़े सवाल और सुझाव मुख्य रूप से मसौदा चरण में उठाए गए थे और यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था। आयोग ने एकतरफा फैसले लिए जाने की धारणा को खारिज किया।
इस तरह ज्ञानेश कुमार को लेकर सहनी के आरोप और चुनाव आयोग की ओर से दी गई सफाई दोनों अलग-अलग दावे हैं। फिलहाल 14 आपत्तियों की रिपोर्ट को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है।

