मुंबई-गोवा हाईवे के महाराष्ट्र वाले 355 किमी हिस्से की लागत 11,409 करोड़ से बढ़कर 16,909 करोड़ रुपये हुई, परशुराम घाट-अरावली पैकेज की लागत में 126% इजाफा; गडकरी ने अक्टूबर में खुद पूरे मार्ग का निरीक्षण करने की बात कही
मुंबई को गोवा से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-66 यानी मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण का काम लंबे समय से जारी है। परियोजना में देरी के साथ इसकी लागत भी लगातार बढ़ी है। ताजा आरटीआई जानकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में 355 किलोमीटर लंबे हाईवे के 10 पैकेजों की मूल स्वीकृत लागत 11,409.14 करोड़ रुपये थी, जो बढ़कर 16,909.22 करोड़ रुपये हो गई है। यानी लागत में करीब 5,500 करोड़ रुपये और लगभग 48 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
परियोजना की देरी का असर मुंबई, एमएमआर और कोंकण के बीच आने-जाने वाले यात्रियों पर भी पड़ रहा है। कई हिस्सों में निर्माण कार्य, पुल और अन्य संरचनाओं के पूरा होने में देरी के कारण यातायात संबंधी परेशानियां बनी हुई हैं।
परशुराम घाट-अरावली पैकेज की लागत 126% बढ़ी
आरटीआई के तहत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, चिपलूण-रत्नागिरी के परशुराम घाट-अरावली पैकेज में लागत वृद्धि सबसे ज्यादा बताई गई है। इस पैकेज की लागत 983 करोड़ रुपये से बढ़कर 2,226 करोड़ रुपये हो गई है, यानी इसमें करीब 126 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
लागत बढ़ने के बावजूद हाईवे के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों में काम पूरा नहीं हुआ है। यही वजह है कि परियोजना की समयसीमा, लागत और निर्माण की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अलग-अलग एजेंसियों के जिम्मे निर्माण
मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण का काम अलग-अलग हिस्सों में अलग एजेंसियों के जरिए कराया जा रहा है। महाराष्ट्र में हाईवे के कुछ हिस्सों का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई और बाकी हिस्सों का काम महाराष्ट्र लोक निर्माण विभाग के जिम्मे है।
काम में देरी की वजहों में ठेकेदारों की विफलता के अलावा अलग-अलग हिस्सों में निर्माण संबंधी अड़चनें भी सामने आती रही हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी हाल में ठेकेदारों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और जिम्मेदार ठेकेदारों तथा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
मुंबई-एमएमआर और कोंकण के यात्रियों को कब मिलेगी राहत?
मुंबई और एमएमआर में रहने वाले बड़ी संख्या में लोग रायगढ़, रत्नागिरी और सिंधुदुर्ग समेत कोंकण के अलग-अलग हिस्सों में नियमित रूप से आते-जाते हैं। गणेशोत्सव जैसे मौकों पर इस मार्ग पर यातायात का दबाव और बढ़ जाता है।
चार लेन का काम पूरा होने के बाद सड़क की क्षमता बढ़ने और यात्रा समय में कमी आने की उम्मीद है। मूल परियोजना का उद्देश्य मुंबई और गोवा के बीच यात्रा समय को करीब 12 घंटे से घटाकर लगभग छह घंटे करना था।
पर्यटन और कारोबार को भी मिल सकता है फायदा
मुंबई-गोवा हाईवे का चौड़ीकरण सिर्फ यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि कोंकण के पर्यटन और स्थानीय कारोबार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। बेहतर सड़क संपर्क से पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होने के साथ कृषि और मछली कारोबार से जुड़े उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी सुविधा मिल सकती है।
मुंबई और गोवा के बीच बेहतर सड़क संपर्क से यात्री और माल परिवहन को भी गति मिलने की उम्मीद है।
गडकरी बोले- हाईवे में देरी से शर्मिंदगी
मुंबई-गोवा हाईवे की देरी को लेकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि परियोजना में हुई देरी से उन्हें शर्मिंदगी है और वह हाईवे के पूरा होने पर उसके उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।
गडकरी के मुताबिक, हालिया बैठक में उन्हें बताया गया कि हाईवे का करीब 93 से 94 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि अक्टूबर में मुंबई एयरपोर्ट पहुंचकर सड़क मार्ग से गोवा जाएंगे और पूरे मार्ग की स्थिति का खुद जायजा लेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि परियोजना में देरी के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
17 साल की देरी के बाद लागत पर भी सवाल
मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण को लेकर लंबे समय से अलग-अलग समयसीमाएं सामने आती रही हैं। परियोजना 2011 में शुरू हुई थी और मूल रूप से 2016 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। अब ताजा आरटीआई आंकड़ों में महाराष्ट्र के 355 किलोमीटर हिस्से की लागत करीब 48 प्रतिशत बढ़कर 16,909.22 करोड़ रुपये हो गई है।
लागत में हजारों करोड़ रुपये की बढ़ोतरी और परियोजना के लंबे समय तक अधूरे रहने से निर्माण की निगरानी, ठेकेदारों की जवाबदेही और बाकी काम पूरा करने की समयसीमा पर सवाल बने हुए हैं।

