‘रामायण’ रिव्यू: रणबीर और यश की दमदार अदाकारी, भव्य दृश्यों ने जीता दिल

Thecity news
10 Min Read

नितेश तिवारी की फिल्म में राम-सीता का प्रेम, रावण का अहंकार और शानदार विजुअल्स देखने को मिलते हैं, कुछ कमियों के बावजूद फिल्म प्रभाव छोड़ती है।

फिल्म: रामायण (पार्ट 1)
निर्देशक: नितेश तिवारी
कलाकार: रणबीर कपूर, यश, साई पल्लवी, रवि दुबे, रकुल प्रीत सिंह, लारा दत्ता, अरुण गोविल, अनुपम खेर, आदिनाथ कोठारे, विवेक ओबेरॉय और सौरभ सचदेवा
रेटिंग: 3.5/5

कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जिनका आकर्षण बार-बार सुनने और देखने के बाद भी कम नहीं होता। रामायण भी ऐसी ही महागाथा है, जो भारतीय समाज की आस्था और भावनाओं से गहराई से जुड़ी है। इसे बड़े पर्दे पर पेश करना आसान नहीं है, क्योंकि दर्शक इसके किरदारों और प्रमुख प्रसंगों से पहले से परिचित हैं।

निर्देशक नितेश तिवारी ने फिल्म ‘रामायण’ के जरिए इस महागाथा को नए सिनेमाई अंदाज और भव्यता के साथ पेश करने की कोशिश की है। रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी जैसे कलाकारों से सजी यह फिल्म प्रेम, त्याग, मर्यादा, अहंकार और धर्म के संघर्ष को बड़े स्तर पर दिखाती है। इसकी खास बात यह है कि कहानी की मूल भावना को बरकरार रखते हुए आधुनिक तकनीक और शानदार दृश्यों का सहारा लिया गया है।

कहानी

फिल्म की कहानी वाल्मीकि रामायण पर आधारित है। शुरुआत देवताओं और असुरों के संघर्ष से होती है। इसके बाद लंका में रावण के उदय की कहानी दिखाई जाती है। यश ने रावण के रूप में ऐसे शासक का किरदार निभाया है, जिसके पास अपार शक्ति और बुद्धिमत्ता है, लेकिन तीनों लोकों पर राज करने की महत्वाकांक्षा भी है।

तपस्या, ब्रह्मा से वरदान प्राप्त करना, इंद्र को पराजित करना और कुबेर से लंका पर अधिकार करने जैसे प्रसंग रावण के व्यक्तित्व को विस्तार देते हैं। इसके बाद कहानी अयोध्या पहुंचती है, जहां राजा दशरथ के घर भगवान विष्णु राम के रूप में जन्म लेते हैं।

राम का बचपन, शिक्षा और शस्त्र विद्या के साथ विश्वामित्र के साथ उनकी यात्रा दिखाई जाती है। ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और मिथिला में सीता स्वयंवर जैसे प्रसंग कहानी को आगे बढ़ाते हैं। राम और सीता का विवाह फिल्म के खूबसूरत हिस्सों में से एक है।

इसके बाद कैकेयी के दो वरदान मांगने से कहानी में बड़ा मोड़ आता है। वह भरत के लिए राजगद्दी और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगती हैं। राम बिना विरोध किए पिता के वचन का सम्मान करते हुए वन जाने का फैसला करते हैं। सीता और लक्ष्मण भी उनके साथ वनवास पर निकल पड़ते हैं।

दूसरी ओर, लंका में रावण की महत्वाकांक्षा और शूर्पणखा से जुड़ी घटनाएं कहानी को आगे बढ़ाती हैं। आखिरकार रावण सीता का हरण कर उन्हें लंका ले जाता है। फिल्म का पहला भाग यहीं तक की कहानी दिखाता है और आगे होने वाले राम-रावण युद्ध की भूमिका तैयार करता है।

निर्देशन

नितेश तिवारी ने इस महागाथा को पर्दे पर उतारने के लिए मेहनत की है। रामायण की कहानी से दर्शक पहले से परिचित हैं, इसलिए चुनौती यह थी कि मूल भावना से छेड़छाड़ किए बिना इसे नया सिनेमाई रूप दिया जाए। निर्देशक इस कोशिश में काफी हद तक सफल नजर आते हैं।

उन्होंने फिल्म को केवल वीएफएक्स और बड़े सेट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि किरदारों के रिश्तों और भावनाओं को भी पर्याप्त जगह दी है। राम और लक्ष्मण का भाईचारा, राम-सीता का प्रेम, कैकेयी के साथ राम का संवाद और रावण की महत्वाकांक्षा जैसे प्रसंग फिल्म को भावनात्मक मजबूती देते हैं।

रामायण केवल एक कहानी या फिल्म नहीं, बल्कि आस्था और भावनाओं का विषय है। ऐसे में इसके किरदारों और संवादों को लेकर विशेष सावधानी जरूरी थी। फिल्म में अनावश्यक बदलाव करने के बजाय मूल प्रसंगों को भव्य तरीके से दिखाने पर ध्यान दिया गया है। हालांकि कुछ जगह कहानी की रफ्तार धीमी पड़ती है, लेकिन निर्देशक ने किरदारों को पर्याप्त समय दिया है।

तकनीकी पक्ष

फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका तकनीकी स्तर है। अयोध्या की भव्यता, मिथिला की खूबसूरती, लंका के महल, जंगल और युद्ध से जुड़े दृश्य शानदार हैं। प्रोडक्शन डिजाइन और सिनेमैटोग्राफी फिल्म की भव्यता को और बढ़ाते हैं।

डीएनईजी के विजुअल इफेक्ट्स फिल्म को बड़े स्तर पर पेश करने में अहम भूमिका निभाते हैं। खासकर रावण से जुड़े दृश्य और जटायु-रावण का संघर्ष देखने लायक हैं। कुछ जगह कंप्यूटर जनित दृश्य (सीजीआई) थोड़े कृत्रिम लगते हैं, लेकिन ज्यादातर दृश्य बड़े पर्दे पर प्रभाव छोड़ते हैं।

पंकज कुमार और महेश लिमये की सिनेमैटोग्राफी तारीफ के काबिल है। हर लोकेशन और दृश्य को खूबसूरती से फिल्माया गया है। वहीं, एआर रहमान और हैंस जिमर का संगीत फिल्म का एक और मजबूत पक्ष है। दोनों का संगीत कहानी के भावनात्मक और पौराणिक माहौल को बेहतर बनाता है। कई दृश्यों में बैकग्राउंड स्कोर दर्शकों को कहानी से भावनात्मक रूप से जोड़ता है।

तीन घंटे से ज्यादा लंबी होने के बावजूद फिल्म के शानदार दृश्य दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते हैं। खासकर नई पीढ़ी के दर्शकों के लिए यह पुरानी कहानी को आधुनिक अंदाज में देखने का मौका है।

अभिनय

रणबीर कपूर ने भगवान राम के किरदार को शालीनता और संयम के साथ निभाया है। उनके चेहरे पर शांति, व्यवहार में मर्यादा और संवादों में गंभीरता नजर आती है। खासकर वनवास स्वीकार करने और कैकेयी के साथ भावनात्मक दृश्यों में उनका अभिनय प्रभावशाली है। उन्होंने राम के किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने की कोशिश नहीं की है।

यश रावण के किरदार में दमदार नजर आते हैं। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और संवाद अदायगी किरदार को अलग पहचान देती है। वह रावण के अहंकार, शक्ति और महत्वाकांक्षा को प्रभावी ढंग से पर्दे पर उतारते हैं। उनके स्क्रीन पर आते ही दर्शकों का ध्यान उनकी ओर खिंचता है।

साई पल्लवी सीता के किरदार में सहज और खूबसूरत लगती हैं। उनके अभिनय में सादगी और गरिमा दिखाई देती है। रवि दुबे ने लक्ष्मण के रूप में अच्छा काम किया है। राम के प्रति उनका समर्पण और दोनों भाइयों की केमिस्ट्री देखने लायक है।

रकुल प्रीत सिंह शूर्पणखा के किरदार में प्रभावित करती हैं। लारा दत्ता कैकेयी के रूप में अच्छी लगती हैं, जबकि अरुण गोविल राजा दशरथ के किरदार में भावनात्मक प्रभाव छोड़ते हैं। अनुपम खेर की आवाज में जटायु का किरदार खास बन पड़ा है। जटायु से जुड़ा दृश्य भावुक कर सकता है। आदिनाथ कोठारे भरत, विवेक ओबेरॉय विद्युतजिह्वा और सौरभ सचदेवा मारीच के किरदार में अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं।

क्या है खास और कहां रह गई कमी?

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी भव्यता और कहानी को पेश करने का अंदाज है। रामायण पहले भी कई बार पर्दे पर दिखाई जा चुकी है, लेकिन आधुनिक तकनीक और शानदार विजुअल्स इस बार का अनुभव अलग बनाते हैं। राम-लक्ष्मण का रिश्ता, राम-सीता की भावनाएं, रावण का व्यक्तित्व और लंका की भव्यता फिल्म को खास बनाते हैं।

कमियों की बात करें तो फिल्म की लंबाई थोड़ी ज्यादा है। कुछ दृश्यों को छोटा किया जा सकता था। वहीं, कुछ जगह सीजीआई को और बेहतर बनाने की गुंजाइश महसूस होती है। हालांकि ये कमियां फिल्म के कुल अनुभव को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करतीं।

वर्डिक्ट

कुल मिलाकर नितेश तिवारी की ‘रामायण’ एक शानदार सिनेमाई अनुभव है। रणबीर कपूर ने राम के किरदार में अपनी अलग छाप छोड़ी है, यश रावण के रूप में दमदार हैं और साई पल्लवी ने सीता के किरदार को खूबसूरती से निभाया है।

फिल्म की भव्यता, शानदार विजुअल्स, बेहतरीन सिनेमैटोग्राफी और एआर रहमान-हैंस जिमर का संगीत इसे बड़े पर्दे पर देखने लायक बनाते हैं। कुछ जगह लंबाई और वीएफएक्स में सुधार की गुंजाइश जरूर है, लेकिन फिल्म की खूबियां इन कमियों पर भारी पड़ती हैं।

बचपन से रामायण की कहानी जानने वाले दर्शकों को भी इसमें कुछ नया देखने को मिलेगा। खासकर नई पीढ़ी के लिए यह फिल्म भारतीय महाकाव्य से जुड़ने का एक शानदार माध्यम बन सकती है।

अगर आप रामायण की कहानी, भव्य सिनेमा और शानदार विजुअल्स के शौकीन हैं, तो यह फिल्म थिएटर में देखने लायक है। आईमैक्स और 3डी में इसका अनुभव और भी शानदार हो सकता है। फिल्म को लेकर बनी उम्मीदें काफी हद तक पूरी होती हैं।

Share This Article