मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। युद्ध के कारण पिछले कई दिनों से कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही थी और देश में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत भी देखने को मिल रही थी।
इसी बीच बुधवार दोपहर करीब 1 बजे सऊदी अरब से कच्चा तेल लेकर आया एक बड़ा टैंकर सुरक्षित मुंबई बंदरगाह पहुंच गया। यह लाइबेरियाई ध्वज वाला टैंकर सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह से रवाना हुआ था। युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में कड़ी पाबंदियों के बावजूद इसका भारत पहुंचना बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।
1.35 लाख मीट्रिक टन सऊदी कच्चा तेल लेकर पहुंचा टैंकर
इस जहाज में करीब 1,35,335 मीट्रिक टन सऊदी कच्चा तेल लाया गया है। इस तेल की आपूर्ति मुंबई के माहुल स्थित रिफाइनरियों में की जाएगी।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस खेप के आने से देश में उत्पन्न ऊर्जा संकट को काफी हद तक नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
भारतीय कप्तान के नेतृत्व में पहुंचा टैंकर
खास बात यह रही कि इस विशाल टैंकर की कमान एक भारतीय कप्तान के हाथों में थी। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री रास्ते में इस टैंकर को क्लीयरेंस देना भारत और ईरान के बीच मजबूत रिश्तों का संकेत माना जा रहा है।
एलपीजी संकट में मिल सकती है राहत
पिछले कुछ हफ्तों से भारत में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित थी और कई जगहों पर ग्राहकों को 25 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा था।
इस नए कच्चे तेल की खेप के आने के बाद रिफाइनरियों में उत्पादन तेज होने की उम्मीद है, जिससे घरेलू और कमर्शियल गैस की किल्लत जल्द कम हो सकती है।
ईरान ने संकट के समय दिया भारत का साथ
ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में शामिल हो गया है। यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
ऐसे मुश्किल समय में ईरान ने भारत के प्रति सहयोग दिखाते हुए भारतीय चालक दल वाले इस टैंकर को रास्ता दिया। बताया जा रहा है कि भारत सरकार ने इस मुद्दे पर ईरान के साथ उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत भी की थी।
फारस की खाड़ी में सक्रिय हैं कई भारतीय जहाज
जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार इस समय फारस की खाड़ी क्षेत्र में 28 भारतीय ध्वज वाले जहाज सक्रिय हैं।
- इनमें से 24 जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में मौजूद हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं।
- वहीं 4 जहाज जलडमरूमध्य के पूर्वी हिस्से में हैं, जिनमें 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं।
एस जयशंकर की कूटनीति को माना जा रहा अहम कारण
सूत्रों के मुताबिक इस सफलता के पीछे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की कूटनीतिक पहल को अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बातचीत कर इस टैंकर के सुरक्षित भारत पहुंचने का रास्ता साफ किया।
विदेश मंत्री जयशंकर ने मंगलवार को फोन पर ईरानी नेता से लंबी चर्चा भी की थी।

