होर्मुज में तनाव और महंगे कच्चे तेल से निवेशकों की चिंता बढ़ी। पीएसयू बैंक शेयरों में तेजी रही, जबकि आईटी और निजी बैंकिंग शेयर दबाव में रहे।
भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को कारोबार के दौरान भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी बढ़त के साथ खुले, लेकिन शुरुआती तेजी ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सकी। बिकवाली के दबाव में बीएसई सेंसेक्स एक समय 560 अंक तक गिर गया।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और एशियाई बाजारों से मिले-जुले संकेतों ने निवेशकों को सतर्क रखा। हालांकि, पीएसयू बैंक शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जबकि आईटी और निजी बैंकिंग शेयरों पर दबाव रहा।
सेंसेक्स 560 अंक तक गिरा, निफ्टी में भी दबाव
सोमवार को सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के 74,729.27 के बंद स्तर के मुकाबले 120.03 अंक यानी 0.16 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,849.30 पर खुला। लेकिन कारोबार बढ़ने के साथ बिकवाली तेज हो गई और सूचकांक 560 अंक यानी 0.74 प्रतिशत गिरकर 74,169.23 के निचले स्तर तक पहुंच गया।
एनएसई निफ्टी 50 भी पिछले बंद स्तर 23,146.15 के मुकाबले 23,150.85 पर खुला। शुरुआती बढ़त के बावजूद बाजार में दबाव बना रहा।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट
बाजार की कमजोरी का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी पड़ा। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.54 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 0.37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टर के लिहाज से निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सूचकांकों में रहा और इसमें 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। निफ्टी ऑयल एंड गैस में भी करीब 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
होर्मुज में तनाव और महंगे कच्चे तेल से चिंता
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। सोमवार को इसमें कुछ नरमी आई और यह करीब 2 प्रतिशत गिरकर 107.76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
वहीं, अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 1 प्रतिशत फिसलकर 100.43 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इसके बावजूद कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
लार्ज-कैप शेयरों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, पिछले सप्ताह निफ्टी में करीब 2.8 प्रतिशत की तेजी और आईटी कंपनियों के उम्मीद से बेहतर नतीजों ने बाजार को सहारा दिया था। बैंकिंग क्षेत्र के मजबूत वित्तीय नतीजे भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित कर सकते हैं।
हालांकि, महंगे कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े शेयरों के आकर्षक मूल्यांकन और रुपये में मजबूती से विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख कुछ सकारात्मक हुआ है। निकट अवधि में लार्ज-कैप शेयर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
कंपनियों के दूसरी तिमाही के वित्तीय नतीजे भी इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर अहम
तकनीकी विश्लेषण के मुताबिक, निफ्टी के लिए 22,950 से 23,000 का दायरा तत्काल सपोर्ट माना जा रहा है। वहीं, 23,250 से 23,300 का स्तर प्रमुख रेजिस्टेंस के रूप में देखा जा रहा है।
विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (आरएसआई) 52.81 पर रहा, जबकि पुट-कॉल रेशियो (पीसीआर) 1.08 दर्ज किया गया।
एफआईआई की खरीदारी, डीआईआई ने की बिकवाली
पिछले कारोबारी सत्र में लगातार 15 सत्रों तक बिकवाली करने के बाद विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुद्ध खरीदार बने थे। उन्होंने करीब 1,166 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
इसके उलट, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने लगातार 45 सत्रों से जारी खरीदारी का सिलसिला तोड़ते हुए लगभग 3,661 करोड़ रुपये की शुद्ध बिकवाली की थी। दोनों श्रेणियों के निवेशकों के अलग-अलग रुख पर बाजार की नजर बनी हुई है।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
सोमवार को एशियाई बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई सूचकांक करीब 0.84

