वैश्विक तनाव का भारतीय बाजार पर असर
ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और संभावित युद्ध की आशंका के चलते दुनियाभर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है। इस वैश्विक उथल-पुथल का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया।
बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,862 अंकों की भारी गिरावट के साथ 77,056 के स्तर पर खुला। वहीं एनएसई का 50 शेयरों वाला निफ्टी 582 अंकों की गिरावट के साथ 23,868 के स्तर पर खुला। बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट देखने को मिली और कई सेक्टरों में तेज बिकवाली दर्ज की गई।
निफ्टी फ्यूचर्स से पहले ही मिल गए थे संकेत
निफ्टी फ्यूचर्स में पहले से ही गिरावट के संकेत दिखाई दे रहे थे। यह पिछले बंद भाव की तुलना में लगभग 722 अंकों की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा था। इससे साफ था कि घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। तेल की कीमतों में इस तेजी से वैश्विक बाजारों में जोखिम भरी संपत्तियों की बिकवाली तेज हो गई है।
एशियाई बाजारों में भी बड़ी गिरावट
एशियाई शेयर बाजारों में भी सोमवार को भारी गिरावट दर्ज की गई। जापान का निक्की 225 सूचकांक 6.22% गिरकर 53,000 के स्तर से नीचे आ गया। वहीं टॉपिक्स इंडेक्स में भी 5.27% की गिरावट दर्ज की गई।
दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स पिछले हफ्ते 11% गिरने के बाद सोमवार को 8% से ज्यादा लुढ़क गया। हालात इतने खराब हो गए कि बाजार में सर्किट ब्रेकर लागू करना पड़ा और ट्रेडिंग को लगभग 20 मिनट के लिए रोक दिया गया। हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स भी वायदा कारोबार में तेज गिरावट के साथ खुला।
अमेरिकी बाजारों के फ्यूचर्स में भी कमजोरी
अमेरिकी शेयर बाजार के फ्यूचर्स में भी भारी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में डॉउ जोन्स फ्यूचर्स करीब 950 अंक तक गिर गए। वहीं एसएंडपी 500 फ्यूचर्स 100 अंकों से अधिक नीचे आ गए और नैस्डैक फ्यूचर्स में लगभग 400 अंकों की गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
वैश्विक तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी बड़ा उछाल आया है। हुर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने और कुवैत, ईरान तथा यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादकों द्वारा उत्पादन में कटौती के बाद ब्रेंट क्रूड 18.03% उछलकर 109.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया।
वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी 20.23% की तेजी के साथ 109.29 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह स्तर रूस-यूक्रेन युद्ध के शुरुआती महीनों के बाद सबसे ऊंचा माना जा रहा है।
कतर के ऊर्जा मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि खाड़ी देशों को युद्ध के कारण तेल उत्पादन रोकना पड़ा तो कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और शेयर बाजारों पर और अधिक दबाव बढ़ सकता है।

