SSC भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव, अब ‘फिक्स’ और ‘फ्लोट’ ऑप्शन से तय होगी पोस्ट

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खाली पदों की संख्या कम करने के लिए आयोग का नया प्रस्ताव, मेरिट और प्रेफरेंस के आधार पर होगा अलॉटमेंट

नई दिल्ली: कर्मचारी चयन आयोग (SSC) ने भर्ती प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और चयन के बाद खाली रह जाने वाले पदों की समस्या को कम करने के लिए एक नई व्यवस्था का प्रस्ताव दिया है। हाल ही में जारी नोटिस में आयोग ने बताया कि इस नई प्रणाली का उद्देश्य अधिकतम रिक्तियों को भरना, अभ्यर्थियों को निष्पक्ष और योग्यता-आधारित अवसर देना और दस्तावेज सत्यापन या जॉइनिंग के दौरान अनुपस्थित रहने वाले उम्मीदवारों के कारण खाली रह जाने वाले पदों को कम करना है।

एसएससी केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों में भर्ती के लिए बड़े स्तर पर परीक्षाएं आयोजित करता है। आयोग के अनुसार हर साल कई पद इसलिए खाली रह जाते हैं क्योंकि कुछ उम्मीदवार दस्तावेज सत्यापन के लिए उपस्थित नहीं होते या चयन के बाद संबंधित विभागों में जॉइन नहीं करते। वर्तमान व्यवस्था में एसएससी के पास वेटिंग लिस्ट रखने का प्रावधान नहीं है, इसलिए इन रिक्तियों को अगली भर्ती में जोड़ना पड़ता है।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत उम्मीदवारों द्वारा आवेदन के समय भरी गई विभागीय प्राथमिकताओं के आधार पर प्रथम चरण का अस्थायी आवंटन यानी FRTA (First Round of Tentative Allocation) किया जाएगा। यह अलॉटमेंट उम्मीदवारों की मेरिट और उनकी विभागीय पसंद को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। हालांकि यह आवंटन तब तक अस्थायी रहेगा जब तक अभ्यर्थी एसएससी के क्षेत्रीय कार्यालय में आधार ऑथेंटिकेशन के जरिए अपनी पहचान सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं कर लेते।

फिक्स या फ्लोट: उम्मीदवारों के पास होंगे दो विकल्प

नई प्रणाली के तहत पहले चरण के अलॉटमेंट के बाद उम्मीदवारों को ‘फिक्स’ या ‘फ्लोट’ में से एक विकल्प चुनना होगा। यदि कोई उम्मीदवार ‘फिक्स’ विकल्प चुनता है तो इसका मतलब होगा कि वह आवंटित पोस्ट को अंतिम रूप से स्वीकार कर रहा है और आगे किसी भी अपग्रेड के लिए पात्र नहीं रहेगा, भले ही बाद में उसकी पसंद की कोई बेहतर पोस्ट उपलब्ध हो जाए।

फ्लोट ऑप्शन से मिल सकता है बेहतर मौका

दूसरी ओर ‘फ्लोट’ विकल्प चुनने वाले उम्मीदवार यह संकेत देते हैं कि यदि उनकी मेरिट और प्राथमिकता सूची के आधार पर कोई बेहतर पद खाली होता है तो वे अपग्रेड के लिए तैयार हैं। हालांकि आयोग ने स्पष्ट किया है कि इसके लिए केवल एक ही स्लाइडिंग राउंड आयोजित किया जाएगा, यानी उम्मीदवारों को अपग्रेड का केवल एक मौका मिलेगा।

CUET और NEET जैसे एग्जाम में पहले से लागू है सिस्टम

फिक्स और फ्लोट जैसा सिस्टम पहले से कई राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में लागू है। CUET UG, CUET PG, NEET UG और NEET PG जैसी परीक्षाओं के काउंसलिंग प्रोसेस में उम्मीदवारों को सीट स्वीकार करने या बेहतर विकल्प के लिए फ्लोट रखने का मौका दिया जाता है। इससे सीटों का बेहतर आवंटन हो पाता है और उम्मीदवारों को भी पसंदीदा संस्थान मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

वेरिफिकेशन के लिए सीमित समय

एसएससी पहले अलॉटमेंट राउंड में चयनित उम्मीदवारों को क्षेत्रीय कार्यालय में जाकर पहचान सत्यापन पूरा करने के लिए लगभग 10 दिनों का समय देने की योजना बना रहा है। अगर कोई उम्मीदवार तय समय में वेरिफिकेशन के लिए उपस्थित नहीं होता है तो उसकी सीट आगे के स्लाइडिंग मैकेनिज्म में दूसरे योग्य उम्मीदवार को दी जा सकती है।

भर्ती प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाएगा SSC

आयोग ने भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाने के लिए टेक्नोलॉजी और ऑपरेशंस पार्टनर के चयन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी किया गया है। नए सेवा प्रदाता के माध्यम से वेब पोर्टल, मोबाइल एप, परीक्षा संचालन प्रणाली और अन्य डिजिटल मॉड्यूल को अपग्रेड किया जाएगा।

इसके अलावा केंद्रीकृत रिजल्ट ERP सिस्टम, उन्नत वेब और मोबाइल प्लेटफॉर्म तथा हिंदी और अंग्रेजी में सहायता देने वाला जनरेटिव एआई आधारित चैटबॉट भी विकसित किया जाएगा, जिससे अभ्यर्थियों को सेवाएं और अधिक आसान और पारदर्शी तरीके से मिल सकेंगी।

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