पश्चिम एशिया संकट पर सरकार का संसद में बयान
पश्चिम एशिया में जारी तनाव और संघर्ष को लेकर केंद्र सरकार ने संसद में अपना आधिकारिक बयान दिया है। विदेश मंत्री Subrahmanyam Jaishankar ने राज्यसभा में कहा कि इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी और भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
उन्होंने कहा कि सरकार वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जरूरत पड़ने पर हर संभव कदम उठाए जाएंगे। विदेश मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि मौजूदा संकट का स्थायी समाधान केवल कूटनीतिक प्रयासों और बातचीत के जरिए ही संभव है।
प्रधानमंत्री लगातार स्थिति पर रखे हुए हैं नजर
राज्यसभा में अपने बयान के दौरान Subrahmanyam Jaishankar ने कहा कि Narendra Modi पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री हर नए घटनाक्रम की समीक्षा कर रहे हैं और विभिन्न मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि किसी भी स्थिति में प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। सरकार का लक्ष्य भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और क्षेत्रीय स्थिरता को बनाए रखना है।
सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील
विदेश मंत्री ने बताया कि भारत सरकार ने 20 फरवरी को ही एक आधिकारिक बयान जारी कर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई थी। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और स्थिति को और अधिक गंभीर होने से रोकने की अपील की।
उन्होंने कहा कि भारत का मानना है कि तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि युद्ध किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।
राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा
जब विदेश मंत्री पश्चिम एशिया की स्थिति पर राज्यसभा में अपना बयान दे रहे थे, उसी दौरान विपक्षी सांसदों ने सदन में शोर-शराबा शुरू कर दिया। इस बीच भी उन्होंने सरकार का पक्ष रखते हुए क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर भारत की चिंताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा।
भारत के लिए क्यों अहम है पश्चिम एशिया
विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत के लिए खास चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, जबकि ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और पेशेवर मौजूद हैं।
इसके अलावा यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से भारत को तेल और गैस की बड़ी आपूर्ति होती है। ऐसे में यदि संघर्ष के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होती है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
ऊर्जा और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है असर
विदेश मंत्री ने चेतावनी दी कि यदि क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है तो तेल और गैस की आपूर्ति में गंभीर बाधाएं आ सकती हैं। इससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत शांति, स्थिरता और संवाद का समर्थन करता है और मौजूदा संकट को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को प्राथमिकता देता रहेगा।

