केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि देश में लगभग 72 करोड़ बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (BSBDA) ऐसे हैं, जिनमें न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की कोई अनिवार्यता नहीं है। इन खातों में Pradhan Mantri Jan Dhan Yojana के तहत खोले गए खाते भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बैंकों द्वारा इन खातों में जीरो बैलेंस सेविंग्स अकाउंट की सुविधा दी जाती है, ताकि देश के हर वर्ग तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई जा सकें।
बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने की पहल
वित्त मंत्री ने कहा कि यह पहल खास तौर पर उन लोगों के लिए शुरू की गई थी, जो लंबे समय तक बैंकिंग सुविधाओं से दूर रहे हैं।
सरकार का उद्देश्य कमजोर वर्गों, छोटे जमाकर्ताओं और ग्रामीण इलाकों के लोगों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना है।
BSBDA खातों में ग्राहकों को जमा और निकासी जैसी बुनियादी बैंकिंग सेवाएं दी जाती हैं। इसके अलावा एटीएम सुविधा भी उपलब्ध होती है और इन सेवाओं के लिए कोई पेनल्टी या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता।
अन्य खातों में लग सकता है मिनिमम बैलेंस चार्ज
सरकार ने स्पष्ट किया कि यह सुविधा केवल BSBDA खातों के लिए है। अन्य बचत खातों में बैंक मिनिमम मंथली एवरेज बैलेंस (MAB) बनाए न रखने पर शुल्क लगा सकते हैं।
यह शुल्क बैंकों की बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीतियों और Reserve Bank of India के दिशा-निर्देशों के अनुसार लगाया जाता है। आरबीआई के नियमों के मुताबिक ऐसे शुल्क उचित, पारदर्शी और सेवाएं उपलब्ध कराने की लागत के अनुरूप होने चाहिए।
तीन साल में ₹8,092 करोड़ की पेनल्टी वसूली
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) ने करंट और सेविंग्स अकाउंट धारकों से मिनिमम एवरेज बैलेंस न रखने पर कुल 8,092.83 करोड़ रुपये वसूले हैं।
हालांकि वित्त मंत्री ने कहा कि यह राशि सरकारी बैंकों की कुल आय का केवल लगभग 0.23 प्रतिशत है, जिससे साफ होता है कि इन शुल्कों का उद्देश्य अतिरिक्त मुनाफा कमाना नहीं बल्कि बैंकिंग सेवाओं की लागत को पूरा करना है।
SBI समेत कई बैंकों ने हटाए चार्ज
ग्राहकों को राहत देने के लिए कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अपने सर्विस चार्ज की समीक्षा की है।
State Bank of India ने मार्च 2020 से सेविंग्स अकाउंट में मिनिमम एवरेज बैलेंस न रखने पर लगने वाले सभी चार्ज खत्म कर दिए हैं।
इसके अलावा 2025 में नौ अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी ऐसे शुल्क पूरी तरह हटा दिए हैं, जबकि दो बैंकों ने मिनिमम बैलेंस से जुड़े चार्ज को कम या आसान बना दिया है।

