नालसार यूनिवर्सिटी के लॉ छात्रों के पंजीकरण पर रोक लगाने वाले आदेश को लेकर विवाद, आदेश वापस लेने और माफी मांगने के बाद भी विरोध जारी
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। नालसार यूनिवर्सिटी से जुड़े विवाद के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। सीजेपी के ‘लीगल कॉकरोच’ आज सुबह 10 बजे मनन कुमार मिश्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
दरअसल, यह पूरा विवाद नालसार यूनिवर्सिटी के लॉ छात्रों के पंजीकरण को लेकर बीसीआई के हस्तक्षेप से जुड़ा है। बुधवार को सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास ने प्रदर्शन की जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था कि ‘लीगल कॉकरोचेस’ एकजुट होकर बीसीआई अध्यक्ष के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। यह प्रदर्शन ‘ऑल इंडिया यंग एडवोकेट्स एसोसिएशन’ की ओर से बुलाया गया है।
मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग क्यों हो रही है?
बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग उनके एक आदेश को लेकर हो रही है। इस आदेश में राज्य बार काउंसिलों से कहा गया था कि वे नालसार यूनिवर्सिटी से 2026 में पास हुए लॉ छात्रों को वकील के रूप में पंजीकृत न करें।
इस आदेश के बाद नालसार के छात्रों ने इसका विरोध किया। विवाद बढ़ने के बाद बीसीआई ने अपना आदेश वापस ले लिया। बाद में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भी इस मामले में बीसीआई के हस्तक्षेप की आलोचना की।
नालसार यूनिवर्सिटी से जुड़ा विवाद क्या है?
नालसार यूनिवर्सिटी में आयोजित दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को बुलाए जाने का प्रस्ताव था। कुछ छात्रों ने इसका विरोध करते हुए संस्थान के कुलपति, रजिस्ट्रार और प्रोफेसरों को पत्र लिखा था।
छात्रों का कहना था कि जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं को लेकर सीजेआई ने पर्याप्त रुचि नहीं दिखाई। उन्होंने इसे असंवेदनशील रवैया बताया। छात्रों का कहना था कि नालसार में उन्हें संविधान, नागरिक स्वतंत्रता और असहमति की आवाज का सम्मान करना सिखाया जाता है, इसलिए सीजेआई से डिग्री लेना उन्हें असहज कर रहा है।
इसके बाद इस विवाद में बीसीआई की एंट्री हुई। बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि अगले आदेश तक नालसार यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के किसी भी लॉ ग्रेजुएट को वकील के रूप में पंजीकृत न किया जाए।
बीसीआई ने कहा था कि वह नालसार यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में सीजेआई की भागीदारी के खिलाफ चलाए गए अभियान से जुड़े आरोपों की जांच कर रहा है। आदेश सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसका विरोध शुरू हो गया। सीजेपी ने इस मुद्दे को लेकर बीसीआई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और बाद में बीसीआई ने अपना आदेश वापस ले लिया।
सीजेआई ने की बीसीआई की आलोचना
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बीसीआई के हस्तक्षेप की आलोचना करते हुए कहा कि यह उनके और छात्रों के बीच का मामला है और इसमें बीसीआई को दखल देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि अदालत छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने से नहीं रोकेगी।
सीजेआई ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्रवाई करने से भी साफ इनकार किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बीसीआई को नोटिस जारी किया है।
मनन मिश्रा ने छात्रों से मांगी माफी
विवाद बढ़ने के बाद स्वतंत्रता दिवस पर बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने लॉ छात्रों से माफी मांगी। उन्होंने कहा कि अगर उनके किसी शब्द या पत्र से छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्हें इसका ईमानदारी से खेद है। उन्होंने कहा कि खेद व्यक्त करना अहंकार का विषय नहीं, बल्कि छात्रों की भावनाओं का सम्मान है।
हालांकि, आदेश वापस लेने और माफी मांगने के बावजूद उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

