पावेल डूरोव ने बताया कि Telegram ने .gram टॉप-लेवल डोमेन के लिए आवेदन किया है, मंजूरी मिली तो यूजर अपने हैंडल से वेब एड्रेस बना सकेंगे; AI की मदद से सिर्फ एक प्रॉम्प्ट से वेबसाइट बनाने की सुविधा भी मिल सकती है
मैसेजिंग ऐप Telegram अब सिर्फ चैट, चैनल और Mini Apps तक सीमित रहने के बजाय इंटरनेट की दुनिया में भी बड़ा कदम बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डूरोव ने बताया है कि Telegram ने .gram टॉप-लेवल डोमेन के लिए आवेदन किया है।
अगर आवेदन मंजूर हो जाता है तो Telegram यूजर अपने यूजरनेम से जुड़ा वेब एड्रेस बना सकेंगे। उदाहरण के तौर पर किसी यूजर का हैंडल राहुल है तो वह भविष्य में rahul.gram जैसे वेब एड्रेस का इस्तेमाल कर सकता है। इस योजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से वेबसाइट तैयार करने की सुविधा भी शामिल हो सकती है।
क्या है .gram डोमेन और कैसे करेगा काम?
जब आप किसी वेबसाइट का पता देखते हैं, जैसे .com या .in, तो ये उसके डोमेन का टॉप-लेवल हिस्सा होते हैं। Telegram का .gram भी इसी तरह का नया टॉप-लेवल डोमेन होगा।
हालांकि, अभी .gram सेवा शुरू नहीं हुई है और Telegram को इसके लिए इंटरनेट कॉरपोरेशन फॉर असाइन्ड नेम्स एंड नंबर्स यानी आईसीएएनएन की मंजूरी का इंतजार करना होगा। 2026 की नई जीटीएलडी प्रक्रिया में आवेदन जमा होने के बाद अभी आगे की समीक्षा और प्रक्रिया बाकी है।
अगर आवेदन सफल होता है तो Telegram अपने यूजरनेम को इंटरनेट पहचान में बदलने की योजना को आगे बढ़ा सकेगा। इसका सीधा मतलब है कि भविष्य में यूजर का Telegram हैंडल ही उसकी वेबसाइट का पता बन सकता है।
एक प्रॉम्प्ट से बन सकती है वेबसाइट
इस पूरे प्लान का सबसे दिलचस्प हिस्सा कृत्रिम बुद्धिमत्ता है। पावेल डूरोव के मुताबिक, यूजर्स अपने .gram एड्रेस पर इंटरैक्टिव वेबसाइट बना सकेंगे और इसके लिए सिर्फ एक प्रॉम्प्ट काफी हो सकता है।
इसका मतलब यह हुआ कि जिन लोगों को वेबसाइट बनाने के लिए कोडिंग की जानकारी नहीं है, वे भी AI की मदद से अपना वेब पेज तैयार कर पाएंगे। अगर यह मॉडल बताए गए तरीके से लागू होता है तो छोटे क्रिएटर्स, चैनल संचालकों और ऑनलाइन कारोबार करने वालों के लिए वेबसाइट बनाना काफी आसान हो सकता है।
हालांकि, मुफ्त वेबसाइट की उपलब्धता, स्टोरेज, कस्टमाइजेशन और दूसरी सुविधाओं से जुड़ी अंतिम शर्तें अभी स्पष्ट नहीं हैं।
Telegram पहले से बढ़ा रहा अपना वेब इकोसिस्टम
यह कदम Telegram की मौजूदा रणनीति से भी जुड़ा दिखाई देता है। कंपनी पहले ही Telegram Browser और Mini App Store जैसी सुविधाएं पेश कर चुकी है।
Telegram Browser सामान्य वेबसाइटों के साथ TON पर आधारित विकेंद्रीकृत वेबसाइटों को भी सपोर्ट करता है। वहीं, Telegram में AI आधारित सुविधाओं का विस्तार भी लगातार हो रहा है। पावेल डूरोव ने हाल में रिच टेक्स्ट एडिटर जैसी सुविधाओं का ऐलान किया है, जिसमें AI कंटेंट समेत कई विकल्प शामिल हैं।
मंजूरी के बाद ही खुलेगा रास्ता
सबसे जरूरी बात यह है कि .gram अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है। आईसीएएनएन की मंजूरी के बिना इसे आम यूजर्स के लिए शुरू नहीं किया जा सकता।
अगर आवेदन सफल रहता है तो Telegram अपने बड़े यूजर बेस की डिजिटल पहचान को मैसेजिंग ऐप से सीधे वेब तक ले जाने की कोशिश कर सकता है। इससे Telegram के लिए एक नया वेब इकोसिस्टम तैयार हो सकता है और प्लेटफॉर्म सिर्फ मैसेजिंग सेवा तक सीमित न रहकर कम्युनिकेशन और इंटरनेट सेवाओं के बड़े नेटवर्क के रूप में विकसित हो सकता है।

