इंजीनियरिंग से एमबीबीएस तक — एक अनोखी करियर री‑इंकॉर्नेशन की कहानी

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बहुत कम लोग ही अपनी पहली डिग्री और नौकरी छोड़कर एक बिल्कुल नया करियर चुनने का साहस करते हैं। हाल ही में ऐसी ही कहानी सामने आई है — एक इंजीनियर जिसने प्रसिद्ध कॉलेज से पढ़ाई की, कॉर्पोरेट दुनिया में काम किया, फिर सब छोड़कर मेडिकल की पढ़ाई की और अब एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा हैं।

🎯 शुरुआत — इंजीनियरिंग से कॉर्पोरेट तक

कहानी की शुरुआत होती है उस दौर से, जब उन्होंने शीर्ष कॉलेज से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। इलेक्ट्रिकल‑इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ उन्होंने मास्टर डिग्री भी ली। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने सीधे स्टार्टअप की दुनिया में कदम रखा। वहाँ उन्होंने लीडरशिप रोल निभाए — ऑपरेशन, डिजाइन, कंटेंट, पीआर आदि संभाला।

लेकिन कॉर्पोरेट जीवन की रफ्तार, स्ट्रेस और बदलते माहौल ने धीरे-धीरे उन्हें असहज करना शुरू कर दिया। 2020 तक आते-आते, उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया।

🔄 नया लक्ष्य — बचपन का डॉक्टर बनने का सपना

नौकरी छोड़ने के बाद कई विकल्पों पर विचार हुआ — जैसे योगा टीचर, HR कंसल्टिंग, NGO आदि। लेकिन अंततः उन्होंने अपने बचपन के सपने को याद किया — डॉक्टर बनने का। 2020 में उन्होंने मेडिकल की तैयारी शुरू की और 2021 में NEET UG पास कर करियर की दिशा बदल दी।

🩺 आज — एमबीबीएस अंतिम वर्ष और नई पहचान

अब वह एक प्रतिष्ठित अस्पताल में एमबीबीएस की अंतिम कक्षा की छात्रा हैं। साथ ही, उन्होंने सोशल मीडिया पर एक डिजिटल‑कम्युनिटी भी शुरू की है, जहाँ वो अपनी यात्रा, चुनौतियाँ और सीख साझा करती हैं। इससे कई युवाओं को “दूसरी शुरुआत” का साहस मिला है।

💡 क्या सीख मिलती है उनकी कहानी से?

  • उम्र, डिग्री या पहली नौकरी — किसी को भी आखिरी फैसला न बनाएं; जब चाहें, नया करियर शुरू कर सकते हैं।
  • असफलता या बदलाव को अस्थायी समझें, बल्कि उसे नए अवसर के रूप में देखें।
  • मेहनत, दृढ़ता और उद्देश्य से बड़ी कामयाबी हासिल हो सकती है — चाहे शुरुआत कितनी भी अलग क्यों न हो।
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