नई दिल्ली: देशभर में सोने की रिकॉर्ड ऊंची कीमतों और संभावित बाजार गिरावट (मार्केट क्रैश) की आशंका के बीच भारतीय परिवार बड़ी संख्या में अपना पुराना सोना बेच रहे हैं। ज्वेलरी उद्योग की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चालू तिमाही में भारतीयों ने करीब 50 टन (50,000 किलोग्राम) पुराना सोना बेचकर रिकॉर्ड स्तर पर मुनाफावसूली (Profit Booking) की है। आमतौर पर पुराने गहनों को बदलकर नए आभूषण खरीदने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार अधिकांश ग्राहक सीधे नकद या बैंक ट्रांसफर लेना पसंद कर रहे हैं।
पुरानी ज्वेलरी की जगह लोग मांग रहे हैं कैश
ज्वेलरी कारोबारियों के अनुसार, पहले ग्राहक पुराने गहनों को एक्सचेंज कर नए आभूषण खरीदते थे, लेकिन अब ट्रेंड तेजी से बदल गया है। दुकानों पर आने वाले 10 में से लगभग 7 ग्राहक सोने की शुद्धता जांचने के बाद उसके बदले सीधे नकद भुगतान या बैंक ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं। पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में पुराना सोना बेचकर कैश लेने के मामलों में 43 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
क्यों बढ़ा गोल्ड मार्केट क्रैश का डर?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतें हाल के महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचने के बाद दबाव में हैं। बाजार में आशंका है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां बदलीं तो सोने की कीमतों में तेज गिरावट आ सकती है।
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों में संभावित बदलाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों के बीच यह धारणा बनी है कि सोने में बड़ा डाउनवर्ड करेक्शन देखने को मिल सकता है। इसी कारण कई लोग मौजूदा ऊंचे भाव पर सोना बेचकर अधिकतम लाभ सुरक्षित करना चाहते हैं।
ज्वेलरी बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, पुराने सोने की रिकॉर्ड बिक्री से ज्वेलर्स के पास रीसायक्लिंग के लिए पर्याप्त कच्चा माल उपलब्ध हो रहा है, लेकिन नई ज्वेलरी की मांग में सुस्ती देखी जा रही है। शादी-ब्याह के सीजन के बावजूद ग्राहक भारी आभूषण खरीदने से बच रहे हैं।
यदि पुराने सोने की बाजार में आवक इसी तरह बढ़ती रही तो घरेलू स्तर पर सोने की उपलब्धता बढ़ सकती है, जिससे आने वाले समय में कीमतों पर दबाव बनने की संभावना भी जताई जा रही है।
गोल्ड रीसाइक्लिंग से मजबूत होगा घरेलू गोल्ड इकोसिस्टम
मुथूट एक्सिम के सीईओ केयूर शाह के अनुसार, ग्राहक अब संगठित और पारदर्शी प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपने पुराने एवं अनुपयोगी सोने को बेचने में अधिक सहज महसूस कर रहे हैं। इससे उन्हें उचित मूल्य मिलने के साथ-साथ रीसाइक्लिंग के जरिए घरेलू गोल्ड इकोसिस्टम भी मजबूत हो रहा है।
कंपनी ग्राहकों से पुराना सोना खरीदकर उसे रिफाइन करती है और 24 कैरेट शुद्ध सोने के रूप में ज्वेलरी निर्माताओं एवं सिक्का निर्माताओं को उपलब्ध कराती है। इससे नई खदानों पर निर्भरता कम होती है और देश में सोने की उपलब्धता भी बढ़ती है।
आयात पर निर्भरता घटाने का बड़ा अवसर
भारत अभी भी अपनी सोने की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। वित्त वर्ष 2026 में देश ने लगभग 72.4 अरब डॉलर का सोना आयात किया। वहीं 2025 में अनुमानित 125 से 150 टन सोने की रीसाइक्लिंग हुई थी।
उद्योग का अनुमान है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो 2026 में रीसायक्लिंग का आंकड़ा 200 से 250 टन तक पहुंच सकता है। माना जाता है कि भारतीय घरों में करीब 30,000 टन सोना मौजूद है, जिसका बड़ा हिस्सा अभी भी उपयोग में नहीं है। ऐसे में संगठित गोल्ड रीसाइक्लिंग भारत की आयात निर्भरता कम करने और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का बड़ा माध्यम बन सकती है।
ऑर्गनाइज्ड गोल्ड रीसाइक्लिंग नेटवर्क का विस्तार
ऑगमॉन्ट ने अपने ‘गोल्ड फॉर ऑल’ नेटवर्क का विस्तार करते हुए कई राज्यों में 114 सेंटर स्थापित किए हैं, जहां ग्राहक अपने पुराने सोने का मूल्यांकन, रीसाइक्लिंग और नकद भुगतान की सुविधा प्राप्त कर सकते हैं।
कंपनी के डायरेक्टर केतन कोठारी का कहना है कि दुनिया में घरेलू स्तर पर सबसे बड़ा गोल्ड स्टॉक भारत के पास है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा निष्क्रिय पड़ा है। संगठित रीसाइक्लिंग नेटवर्क इस निष्क्रिय संपत्ति को अर्थव्यवस्था के लिए उपयोगी संसाधन में बदल सकता है।

