चेन्नई: हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों और समुद्री सुरक्षा जरूरतों को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अपनी सैन्य क्षमता विस्तार का बड़ा खाका पेश किया है। नौसेना प्रमुख एडमिरल Dinesh K. Tripathi ने ऐलान किया है कि वर्ष 2035 तक भारत के पास 200 से अधिक युद्धपोतों वाला एक सशक्त नौसैन्य बेड़ा होगा।
चेन्नई में INS अंजदीप के शामिल होने पर हुआ ऐलान
यह घोषणा INS Anjadip को सेवा में शामिल करने के अवसर पर की गई। कार्यक्रम Chennai Port पर आयोजित किया गया, जहां नौसेना प्रमुख ने ‘2035 प्लान’ का विस्तार से खुलासा किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विस्तार केवल संख्या में वृद्धि नहीं होगा, बल्कि तकनीकी क्षमता, मारक शक्ति और ऑपरेशनल दक्षता के स्तर पर भी भारतीय नौसेना को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
2026 में बन सकता है नया रिकॉर्ड
एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि युद्धपोतों को बेड़े में शामिल करने की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है।
- वर्ष 2025 में भारतीय नौसेना ने 12 युद्धपोत और एक पनडुब्बी को शामिल किया।
- वर्ष 2026 में लगभग 15 नए जहाज शामिल करने की योजना है।
यदि यह लक्ष्य हासिल होता है, तो यह एक ही वर्ष में सबसे अधिक जहाजों को शामिल करने का रिकॉर्ड होगा। यह उपलब्धि नौसेना की बढ़ती अभियानगत क्षमता और समुद्री सुरक्षा कवच को दर्शाती है।
‘मेक इन इंडिया’ से ‘ट्रस्ट इन इंडिया’ तक
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को लेकर नौसेना ने बड़ा बदलाव दर्ज किया है। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा अब ‘मेक इन इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘ट्रस्ट इन इंडिया’ के चरण में प्रवेश कर चुकी है।
वर्तमान में नौसेना द्वारा ऑर्डर किए गए सभी 50 जहाजों का निर्माण भारतीय शिपयार्ड्स में किया जा रहा है। लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक पोत निर्माण के घटक स्तर पर भी पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल की जाए, ताकि भारत रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह स्वावलंबी बन सके।
INS अंजदीप: पनडुब्बियों के खिलाफ मजबूत हथियार
INS अंजदीप उथले पानी में संचालन करने वाले 16 पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की श्रृंखला का चौथा पोत है। इसे विशेष रूप से पूर्वी तट की समुद्री सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।
यह अत्याधुनिक सोनार प्रणाली, हल्के टॉरपीडो, पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उन्नत युद्ध प्रबंधन प्रणाली से लैस है। इसकी तकनीकी क्षमता इसे दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए बेहद घातक बनाती है।
हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक पकड़
भारतीय नौसेना का यह विस्तार हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी, समुद्री डकैती विरोधी अभियानों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाएगा।
2035 तक 200 से अधिक युद्धपोतों का लक्ष्य भारत को वैश्विक समुद्री शक्तियों की कतार में और मजबूत स्थान दिला सकता है।
निष्कर्ष
बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच भारतीय नौसेना का यह मास्टरप्लान न केवल रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को भी नई गति देगा। 2035 और 2047 के स्पष्ट रोडमैप के साथ नौसेना आने वाले दशकों के लिए अपनी रणनीतिक तैयारी पुख्ता कर रही है।

