
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। वह रविवार, 2 नवंबर को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अब तक का सबसे भारी संचार उपग्रह CMS-03 लॉन्च करेगा। इसका वजन 4,410 किलोग्राम है और यह शाम 5:26 बजे प्रक्षेपित किया जाएगा।
‘बाहुबली’ रॉकेट से होगा प्रक्षेपण
इस उपग्रह को ISRO के सबसे शक्तिशाली प्रक्षेपण यान LVM3-M5 से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। इस रॉकेट को इसकी विशाल पेलोड क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है। यह वही रॉकेट है जिसने 2023 में चंद्रयान-3 को चंद्रमा की सतह पर सफलता पूर्वक पहुंचाया था।
CMS-03 उपग्रह की क्षमता और महत्व
CMS-03 एक बहु-बैंड संचार उपग्रह (Multi-Band Communication Satellite) है जो भारत के संचार, इंटरनेट और प्रसारण नेटवर्क को मजबूत करेगा। यह स्थलीय और समुद्री दोनों क्षेत्रों में सेवाएं प्रदान करेगा। इस उपग्रह का कवरेज भारत के भूभाग और आस-पास के समुद्री इलाकों तक फैला होगा।
डिजिटल इंडिया मिशन को मिलेगा बल
यह उपग्रह देश के दूरस्थ इलाकों में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा और आपदा प्रबंधन, रक्षा संचार और डिजिटल नेटवर्किंग को मजबूती देगा। ISRO के मुताबिक, CMS-03 मिशन भारत की आत्मनिर्भर अंतरिक्ष तकनीक और स्वदेशी उपग्रह निर्माण क्षमता को दर्शाता है।
LVM3-M5 रॉकेट की तकनीकी ताकत
LVM3-M5 रॉकेट की ऊंचाई 43.5 मीटर है और इसे 4,000 किलोग्राम तक के उपग्रहों को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) तथा 8,000 किलोग्राम तक के उपग्रहों को लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) तक पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। रॉकेट को पूरी तरह एकीकृत कर अंतिम परीक्षण के लिए लॉन्च पैड पर पहुंचा दिया गया है।
भारत की बढ़ती अंतरिक्ष शक्ति का प्रतीक
CMS-03 मिशन से भारत के संचार उपग्रह नेटवर्क को नई दिशा मिलेगी। यह न केवल तकनीकी क्षमता को बढ़ाएगा, बल्कि देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरिक्ष संचार क्षेत्र में और मजबूत बनाएगा। यह लॉन्च भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों और स्वदेशी क्षमता का एक और मील का पत्थर साबित होगा।

