झारखंड में 22 प्रतियोगी परीक्षाएं रद्द, 2,394 नियुक्त अधिकारी-कर्मचारी सड़क पर; 23 परीक्षाओं की सीआईडी जांच

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झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बीच राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से जुड़ी 22 प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह रद्द कर दिया है। इसके अलावा 23 अन्य परीक्षाओं की जांच सीआईडी को सौंप दी गई है। सरकार के इस फैसले के बाद जहां 26 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों ने अपना धरना स्थगित कर दिया, वहीं विभिन्न सरकारी विभागों में तैनात 2,394 नव-नियुक्त अधिकारी और कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। इनमें से कई अभ्यर्थियों ने फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

आंदोलन खत्म, दूसरी तरफ नया असंतोष

सरकार के फैसले के बाद रांची में दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिल रही हैं। झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 26 दिनों से छात्र आंदोलन कर रहे थे। सरकार द्वारा 22 परीक्षाएं रद्द करने, 23 परीक्षाओं की सीआईडी जांच कराने और आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार कमेटी गठित करने के आश्वासन के बाद आंदोलनकारी छात्रों ने अपना धरना दो महीने के लिए स्थगित कर दिया है।

वहीं, जिन अभ्यर्थियों ने परीक्षा पास करने के बाद पिछले कई महीनों से सरकारी विभागों में अधिकारी और कर्मचारी के तौर पर सेवाएं दी थीं, उनके सामने अब नई मुश्किल खड़ी हो गई है। बुधवार को सचिवालय स्थित प्रोजेक्ट भवन पहुंचे कई अधिकारियों को अंदर प्रवेश नहीं करने दिया गया। इसके बाद उन्होंने मुख्य द्वार के बाहर प्रदर्शन किया। प्रभावित अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं।

जेएसएससी-सीजीएल से नियुक्त 1,932 युवाओं सहित 2,394 पदों पर असर

सरकार द्वारा रद्द की गई 22 परीक्षाओं में चार ऐसी परीक्षाएं शामिल हैं, जिनकी चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी और अभ्यर्थी विभिन्न विभागों में तैनात होकर काम कर रहे थे। इन भर्तियों से जुड़े 2,394 पदों पर असर पड़ा है।

जेएसएससी-सीजीएल से बहाल 1,932 पद

  • सहायक प्रशाखा पदाधिकारी: 847 पद
  • कनीय सचिवालय सहायक: 293 पद
  • श्रम प्रवर्तन अधिकारी: 170 पद
  • प्रखंड कल्याण अधिकारी: 191 पद
  • प्रखंड आपूर्ति अधिकारी: 249 पद
  • अंचल निरीक्षक-कानूनगो: 178 पद

जेपीएससी और अन्य सेवाओं से बहाल अधिकारी

  • 11वीं-13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा: 342 अधिकारी
  • बाल विकास परियोजना पदाधिकारी: 64 अधिकारी
  • खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी: 54 से 56 अधिकारी
  • अन्य संवर्ग, जिनमें एसडीपीओ और महिला पर्यवेक्षिका समेत अन्य पद शामिल हैं: 300 से अधिक

किन 22 परीक्षाओं को किया गया रद्द?

सरकार के आदेश के अनुसार रद्द की गई परीक्षाओं में विश्वविद्यालयों के गैर-शैक्षणिक पदों की भर्ती, सहायक निदेशक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर, इंजीनियरिंग कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, पॉलिटेक्निक में लेक्चरर, मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर, सिविल जज, सहायक वन संरक्षक, वन क्षेत्र पदाधिकारी, सहायक लोक अभियोजक, संयुक्त सिविल सेवा, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, 11वीं-13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा, छठी सीमित उप समाहर्ता भर्ती, झारखंड पात्रता परीक्षा और जेएसएससी-सीजीएल समेत अन्य परीक्षाएं शामिल हैं।

इनमें जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा के तहत 1,932 पद थे, जबकि 11वीं-13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के तहत 342 पद शामिल हैं।

23 पुरानी परीक्षाओं की अब सीआईडी करेगी जांच

22 परीक्षाओं को रद्द करने के अलावा राज्य सरकार ने वर्ष 2010 से 2022 के बीच आयोजित 23 पुरानी और संवेदनशील परीक्षाओं की जांच भी सीआईडी को सौंपने का फैसला किया है। इन परीक्षाओं के जरिए वर्तमान में करीब 2,044 अधिकारी और कर्मचारी राज्य के विभिन्न विभागों में काम कर रहे हैं।

जांच के दायरे में 5वीं संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा, सिविल जज भर्ती परीक्षाएं, मृदा संरक्षण पदाधिकारी, सहायक निदेशक कृषि, खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी, दंत चिकित्सक, संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा, वाणिज्यिक कर, छठी जेपीएससी, भू-वैज्ञानिक एवं रसायनज्ञ, सहायक लोक अभियोजक, संयुक्त सहायक अभियंता और 7वीं-10वीं जेपीएससी समेत कई परीक्षाएं शामिल हैं।

इस तरह कुल 45 परीक्षाएं अब सरकार की कार्रवाई और जांच के दायरे में आ गई हैं।

2,394 नियुक्तियों पर असर से प्रशासनिक संकट

एक ही दिन में बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं प्रभावित होने से झारखंड के प्रशासनिक ढांचे पर भी असर पड़ने लगा है। राज्य सचिवालय में 854 सहायक प्रशाखा पदाधिकारी फाइल कस्टोडियन के तौर पर काम कर रहे थे। पिछले करीब आठ महीनों से विभिन्न विभागों की फाइलों को आगे बढ़ाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। इनके हटने के बाद अब प्रशाखा पदाधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है।

राज्य प्रशासनिक सेवा के स्वीकृत 1,450 पदों में बेसिक ग्रेड के 850 डिप्टी कलेक्टर पद हैं। इनमें पहले से करीब 250 पद खाली थे। 11वीं-13वीं जेपीएससी से नियुक्त 207 नए उप समाहर्ताओं को प्रशिक्षण के बाद हाल ही में अंचल और प्रखंड स्तर की जिम्मेदारी दी गई थी। इनकी सेवाएं प्रभावित होने से प्रशासनिक संकट और गहरा गया है।

पुलिस और बाल विकास सेवाओं पर भी असर

राज्य पुलिस सेवा में डीएसपी रैंक के करीब 35 पद पहले से खाली बताए जा रहे हैं। नए नियुक्त 35 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त होने की स्थिति में यह संख्या करीब 70 तक पहुंच सकती है। इससे जिलों में कानून-व्यवस्था संभालने में परेशानी बढ़ने की आशंका है।

इसी तरह 64 बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों की सेवाएं प्रभावित होने से आंगनबाड़ी और बाल विकास परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। वहीं खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों की नियुक्तियां प्रभावित होने से खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी और कार्रवाई भी प्रभावित होने की आशंका है।

हाईकोर्ट में दी चुनौती, उठाया प्राकृतिक न्याय का सवाल

सरकार के फैसले के खिलाफ नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बिना किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत संलिप्तता या दोष तय किए पूरी परीक्षा प्रक्रिया को रद्द करना और उसके आधार पर पिछले कई महीनों से काम कर रहे अभ्यर्थियों की सेवाएं समाप्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो जांच के बाद दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है, जिन्होंने मेहनत करके परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की।

अमिताभ कौशल कमेटी करेगी परीक्षा सुधार पर काम

प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और भविष्य में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने आईएएस अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय परीक्षा सुधार समिति गठित की है। समिति में प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के निदेशकों को भी शामिल किया गया है।

यह समिति दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर राज्य में नई और पारदर्शी परीक्षा नियमावली तैयार की जाएगी। फिलहाल सरकार के फैसले, प्रभावित अभ्यर्थियों की याचिकाओं और हाईकोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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