
तिरुवनंतपुरम: केरल में केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (PM SHRI) योजना को लेकर राजनीतिक घमासान छिड़ गया है। राज्य की सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) सरकार ने फिलहाल इस योजना के कार्यान्वयन पर रोक लगा दी है।
📜 बिना कैबिनेट की मंजूरी के हस्ताक्षर पर बवाल
विवाद तब भड़का जब यह खुलासा हुआ कि मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने कैबिनेट को सूचित किए बिना PM SHRI योजना से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए।
पहले LDF सरकार इस योजना के विरोध में थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हालिया मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री ने केंद्र के साथ करार पर हस्ताक्षर किए।
इस कदम से CPI (Communist Party of India) नाराज है, जिसने इसे “शिक्षा का सांप्रदायिकीकरण, केंद्रीकरण और व्यावसायीकरण” बताया है।
🏫 क्या है पीएम श्री योजना?
PM SHRI योजना, केंद्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 का हिस्सा है। इसका उद्देश्य देशभर के 14,500 सरकारी स्कूलों को मॉडल संस्थान बनाना है।
योजना के तहत केंद्र 60% फंडिंग देता है, जबकि राज्य सरकारों का योगदान 40% होता है।
मुख्य शर्तों में से एक यह है कि स्कूलों के नाम के आगे ‘PM SHRI’ टैग लगाया जाएगा और NEP के बहुभाषी शिक्षा प्रावधान लागू किए जाएंगे।
इन्हीं शर्तों का केरल समेत दक्षिण भारत के कई राज्यों में विरोध हो रहा है।
🔍 CPI का आरोप: “राज्य सरकार ने विश्वास तोड़ा”
CPI के मंत्रियों ने बुधवार को कैबिनेट बैठक का बहिष्कार किया और कहा कि मुख्यमंत्री ने सहयोगियों से परामर्श किए बिना निर्णय लिया।
पार्टी ने मांग की है कि राज्य सरकार समझौते को रद्द करे, केंद्र को लिखित रूप से सूचित करे, और पत्र को सार्वजनिक रूप से जारी करे।
हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक अब केरल MoU से पीछे नहीं हट सकता — ऐसा करने पर केंद्र सरकार वसूली की कार्यवाही कर सकती है।
🛑 योजना के कार्यान्वयन पर फिलहाल रोक
LDF सरकार ने मामले की जांच के लिए 7 सदस्यीय कैबिनेट उपसमिति गठित की है। समिति की रिपोर्ट आने तक योजना की सभी गतिविधियां स्थगित रहेंगी।
राज्य सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वह केंद्र को कुछ शर्तों में ढील देने का अनुरोध करेगी।
मुख्यमंत्री विजयन ने शिक्षा विभाग को फिलहाल योजना में शामिल स्कूलों की सूची रोकने का आदेश दिया है।
🎓 दक्षिण भारत में बढ़ता विरोध
PM SHRI योजना की कई शर्तों को संघीय ढांचे और राज्य की शिक्षा नीति में हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है।
तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना जैसे राज्य NEP 2020 के “एक देश, एक पाठ्यक्रम” दृष्टिकोण के खिलाफ हैं।
राज्य सरकारों का कहना है कि शिक्षा एक राज्य का विषय है, और केंद्र को इसमें नीतिगत नियंत्रण नहीं होना चाहिए।

