महाराष्ट्र सरकार की मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना में पात्रता की सख्त जांच के बाद बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। शुरुआती दौर में करीब 2 करोड़ 53 लाख महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही थी, लेकिन नई जांच के बाद बड़ी संख्या में महिलाओं के योजना से बाहर होने की संभावना जताई जा रही है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार पात्रता की विस्तृत जांच के बाद लगभग 1 करोड़ 5 लाख महिलाएं निर्धारित मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं। इसी कारण 2026-27 के बजट में योजना के लिए लाभार्थियों की संख्या कम करते हुए करीब 1 करोड़ 48 लाख महिलाओं के लिए ही प्रावधान रखा गया है।
बजट में 19 हजार करोड़ रुपये की कमी
लाडकी बहिन योजना के लिए शुरुआत में लगभग 45 हजार करोड़ रुपये का बजट तय किया गया था। लेकिन अब संभावित लाभार्थियों की संख्या घटने के कारण इस साल के बजट में करीब 26,500 करोड़ रुपये का ही प्रावधान किया गया है।
इस तरह पिछले वर्ष की तुलना में योजना के बजट में लगभग 19 हजार करोड़ रुपये की कमी की गई है।
क्या हैं योजना के प्रमुख पात्रता मानदंड
सरकार ने योजना के लिए कुछ स्पष्ट पात्रता शर्तें तय की हैं।
- लाभार्थी महिला की आयु 21 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
- परिवार के पास ट्रैक्टर को छोड़कर कोई चारपहिया वाहन नहीं होना चाहिए।
- एक परिवार में एक विवाहित और एक अविवाहित महिला ही लाभ ले सकती हैं।
- महिला केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य व्यक्तिगत योजना की लाभार्थी नहीं होनी चाहिए।
- परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होनी चाहिए।
- लाभार्थी महिला सरकारी कर्मचारी नहीं होनी चाहिए।
जांच के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं अपात्र
योजना के शुरुआती चरण में कम दस्तावेजों के आधार पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने आवेदन किया था और उन्हें कुछ महीनों तक लाभ भी मिला। लेकिन दिसंबर 2024 से पात्रता की विस्तृत जांच शुरू की गई।
जांच के दौरान आय, वाहन और अन्य मानदंडों की पुष्टि की जा रही है। अधिकारियों का अनुमान है कि करीब 1 करोड़ 5 लाख महिलाएं जांच के बाद अपात्र घोषित की जा सकती हैं।
आय का मानदंड बना सबसे बड़ी वजह
योजना में परिवार की वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से कम होना अनिवार्य है। अब ई-केवाईसी के माध्यम से लाभार्थियों की वास्तविक आय और अन्य जानकारी का सत्यापन किया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि कई महिलाओं ने जांच से बचने के लिए अभी तक ई-केवाईसी नहीं कराया है, जिससे भी उनकी पात्रता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
31 मार्च तक ई-केवाईसी जरूरी
सरकार ने ई-केवाईसी कराने की अंतिम तारीख 31 मार्च तय की है। 1 अप्रैल से केवल वही महिलाएं हर महीने 1500 रुपये की सहायता प्राप्त कर सकेंगी, जो सभी पात्रता मानदंडों को पूरा करती होंगी।
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी प्रसाद मिरकले के अनुसार आंगनवाड़ी सेविकाओं के माध्यम से सभी लाभार्थियों की जांच की गई है और आगे केवल पात्र महिलाओं को ही योजना का लाभ दिया जाएगा।
योजना की वर्तमान स्थिति
- शुरुआती लाभार्थी: 2.53 करोड़
- शुरुआती बजट: 45,000 करोड़ रुपये
- जांच के बाद संभावित पात्र लाभार्थी: 1,48,60,000
- 2026-27 बजट प्रावधान: 26,500 करोड़ रुपये
- संभावित अपात्र महिलाएं: लगभग 1.05 करोड़

