पटरियों पर पानी जमा होने पर भी लोकल ट्रेनें चलती रहेंगी

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मुंबई। मुंबई में हर साल मानसून के दौरान रेलवे पटरियों पर जलभराव एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आती है। विशेष रूप से लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी) और कुर्ला स्टेशन के बीच भारी मात्रा में पानी जमा होने से ट्रेन परिचालन प्रभावित होता है। अब मध्य रेलवे ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कदम उठाए हैं।

आईआईटी मुंबई की सिफारिश पर बनेगा भूमिगत जल टैंक
आईआईटी मुंबई की सिफारिश के अनुसार, एलटीटी क्षेत्र में एक विशाल भूमिगत जल भंडारण टैंक बनाया जाएगा। इस टैंक की क्षमता लगभग 10 करोड़ लीटर होगी, जिससे मानसून के दौरान जमा पानी को सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जा सकेगा।

जलभराव वाले क्षेत्रों का किया गया अध्ययन
मुंबई रेलवे विकास निगम (एमआरवीसी) के निर्देश पर आईआईटी मुंबई ने जलभराव की समस्या पर गहन अध्ययन किया। इसमें मध्य रेलवे के कुर्ला से एलटीटी और पश्चिम रेलवे के दादर से लोअर परेल खंडों का निरीक्षण किया गया। विशेषज्ञों ने जल प्रवाह, बाढ़ प्रबंधन और निकासी प्रणालियों के प्रभावी एवं किफायती उपायों पर सुझाव दिए।

सर्वे रिपोर्ट सौंपी गई रेलवे प्रशासन को
इस अध्ययन के बाद आईआईटी मुंबई ने एक विस्तृत सर्वे रिपोर्ट रेलवे प्रशासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि कुर्ला-एलटीटी क्षेत्र में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) की तरह एक बड़ा भूमिगत जल टैंक बनाया जाए, जिसकी क्षमता लगभग 1,16,800 घन मीटर होगी।

56 करोड़ रुपये की बड़ी परियोजना शुरू
मध्य रेलवे ने वर्षा ऋतु में रेल पटरियों पर जमा पानी की निकासी के लिए 56 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू करने की योजना बनाई है। इस परियोजना के तहत न सिर्फ नए टैंक बनाए जाएंगे, बल्कि पुराने जल निकासी तंत्र को भी अपग्रेड किया जाएगा।

वर्षा जल संग्रहण और पुनः निकासी की व्यवस्था
इस परियोजना के अंतर्गत बनाए जा रहे भूमिगत टैंकों में मानसून का पानी जमा किया जाएगा। वर्षा थमने के बाद, इन टैंकों में जमा पानी को उच्च क्षमता वाले पंपों की मदद से समुद्र में छोड़ा जाएगा, जिससे रेलवे पटरियों से पानी तेजी से निकलेगा और ट्रेनों की आवाजाही सुचारू बनी रहेगी।

मौजूदा टैंकों की क्षमता अपर्याप्त
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल जो जल भंडारण टैंक मौजूद हैं, उनकी भंडारण क्षमता बेहद सीमित है। इस वजह से लगातार हो रही भारी बारिश के दौरान पानी तेजी से भर जाता है और पटरियों पर बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है। नई परियोजना इन कमियों को दूर करेगी।

रेल यातायात पर पड़ेगा सकारात्मक प्रभाव
कुर्ला से एलटीटी खंड को मुंबई के सबसे अधिक जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है। नए भूमिगत टैंकों और निकासी प्रणाली के निर्माण से रेल यातायात पर मानसून के प्रभाव में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसे जल्द पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

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