
मुंबई/रायगढ़: अगले साल जनवरी 2026 में होने वाले महाराष्ट्र निकाय चुनाव को लेकर राज्य की सियासत गर्मा गई है। विभिन्न दलों के नेता और कार्यकर्ता लगातार पाला बदल रहे हैं। इसी कड़ी में रायगढ़ जिले में शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को एक बड़ा झटका लगा है।
⚡ एनसीपी (अजीत पवार) ने मारी बाजी
एनसीपी (अजीत पवार गुट) के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे ने शनिवार को युवा उद्यमी सुशांत जाबड़े को पार्टी में शामिल किया। जाबड़े शिवसेना मंत्री भरत गोगावले के करीबी माने जाते हैं। इस राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर रायगढ़ की राजनीति में हलचल मच गई है।
🤝 सुशांत जाबड़े ने थामा एनसीपी का दामन
सुशांत जाबड़े ने सार्वजनिक रूप से एनसीपी में शामिल होते हुए कहा कि वे अजीत पवार के नेतृत्व में विकास की राजनीति से प्रभावित हैं। उन्होंने तटकरे के मार्गदर्शन में जिले में युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमशीलता के नए अवसरों पर काम करने की बात कही।
🔁 शिवसेना (एकनाथ) के लिए झटका
सुशांत जाबड़े का एनसीपी में जाना मंत्री भरत गोगावले के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वे लंबे समय से उनके साथ संगठन में सक्रिय थे। स्थानीय राजनीतिक समीकरणों में यह बदलाव आगामी निकाय चुनावों में मतदाताओं के रुझान को प्रभावित कर सकता है।
🏛️ रायगढ़ में शिवसेना-एनसीपी के बीच बढ़ी टक्कर
रायगढ़ में इन दिनों शिवसेना (एकनाथ शिंदे) और एनसीपी (अजीत पवार) के बीच राजनीतिक घमासान चरम पर है। दोनों दलों ने अपने-अपने गढ़ मजबूत करने के लिए बूथ स्तर पर तैयारी तेज़ कर दी है। अब जाबड़े के शामिल होने से एनसीपी को युवाओं के बीच मजबूती मिलने की उम्मीद है।
🔍 क्या असर पड़ेगा चुनावी समीकरण पर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रायगढ़ में शिवसेना और एनसीपी के बीच सीधी टक्कर देखने को मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर ऐसे दल-बदल से वोट बैंक और उम्मीदवार चयन रणनीति पर असर पड़ना तय है।

