मुंबई: शहर की सड़कों पर बढ़ते ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए Brihanmumbai Municipal Corporation (बीएमसी) ने एक महत्वाकांक्षी और दूरगामी परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। इस योजना के तहत दक्षिण मुंबई, पश्चिमी उपनगरों और ठाणे-मीरा भाईंदर क्षेत्र को तेज और सिग्नल-फ्री सड़क नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
परियोजना के तहत Mumbai Coastal Road (नॉर्थ) को Goregaon-Mulund Link Road (GMLR) से जोड़ने के लिए एक एलिवेटेड कनेक्टर बनाया जाएगा, जिससे शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा।
वर्सोवा से दहिसर तक सिग्नल-फ्री कनेक्टिविटी
प्रस्तावित कोस्टल रोड (नॉर्थ) वर्सोवा इंटरचेंज से शुरू होकर दहिसर इंटरचेंज तक फैलेगी।
मालाड के माइंडस्पेस जंक्शन से एक ऊंचा कनेक्टर निकलेगा, जो गोरेगांव (पूर्व) में GMLR के शुरुआती बिंदु से जुड़ेगा। इस नए कॉरिडोर से मुंबई में उत्तर-दक्षिण के साथ-साथ पूर्व-पश्चिम दिशा में भी यातायात को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
परियोजना को जुलाई 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
4 चरणों में विकसित हो रही GMLR परियोजना
GMLR परियोजना को चार चरणों में विकसित किया जा रहा है।
- तीसरे चरण में Sanjay Gandhi National Park और आरे कॉलोनी के नीचे 13 मीटर व्यास की दोहरी सुरंग बनाई जा रही है।
- अब तक फ्लाईओवर का लगभग 48% और टनल का करीब 18% कार्य पूरा हो चुका है।
अधिकारियों के अनुसार, गोरेगांव से मुलुंड की यात्रा, जो अभी करीब 90 मिनट लेती है, भविष्य में केवल 20 से 30 मिनट में पूरी हो सकेगी।
रोजाना हजारों वाहनों को मिलेगा फायदा
- वर्सोवा से मालाड के बीच प्रतिदिन लगभग 78,000 वाहन इस मार्ग का उपयोग कर सकेंगे।
- मालाड से दहिसर के बीच करीब 62,000 वाहनों को राहत मिलेगी।
- दहिसर (पश्चिम) से भाईंदर (पश्चिम) तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड जनवरी 2029 तक पूरी होने की संभावना है, जिससे रोजाना करीब 75,000 वाहन चालकों को लाभ होगा।
परियोजना में 14.2 मीटर व्यास की विशाल सुरंगें बनाई जाएंगी, जो देश की सबसे बड़ी सुरंगों में शामिल होंगी।
आधुनिक सुविधाएं और पर्यावरणीय लाभ
इस कॉरिडोर में मल्टी-लेवल इंटरचेंज, ओपन गैंट्री सिस्टम और व्यूइंग गैलरी जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।
कोस्टल रोड (नॉर्थ) के पूरा होने पर वर्सोवा से दहिसर की यात्रा में 30 से 40 मिनट की बचत होने की उम्मीद है।
साथ ही, कार्बन उत्सर्जन में लगभग 48% तक कमी आने का अनुमान लगाया गया है, जिससे पर्यावरण को भी लाभ होगा।
सभी आवश्यक मंजूरियां प्राप्त
इस परियोजना को Maharashtra Maritime Board, Ministry of Environment, Forest and Climate Change और राज्य के मैंग्रोव सेल से हरी झंडी मिल चुकी है।
इसके अलावा Bombay High Court की अनुमति भी प्राप्त हो चुकी है। फिलहाल जमीन पर यूटिलिटी शिफ्टिंग का कार्य तेजी से जारी है।
निष्कर्ष
मुंबई के ट्रैफिक संकट को कम करने के लिए कोस्टल रोड (नॉर्थ) और GMLR को जोड़ने की यह परियोजना गेम-चेंजर साबित हो सकती है। 2029 तक इसके पूरा होने के बाद न केवल यात्रा समय में भारी कमी आएगी, बल्कि हजारों वाहन चालकों को रोजाना जाम से राहत मिलेगी।

