
नई दिल्ली: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर दोबारा प्रतिबंध लगाने की मांग की। दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने खुद 1948 में RSS को देश के लिए ‘खतरनाक’ बताया था।
📜 खड़गे ने पढ़ा पटेल का 1948 का पत्र
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान खड़गे ने 4 फरवरी 1948 को सरदार पटेल द्वारा श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे पत्र का हवाला दिया।
उन्होंने कहा —
“पटेलजी ने लिखा था कि गांधीजी की हत्या पर RSS के लोगों ने मिठाई बांटी और खुशी जताई। इन परिस्थितियों में सरकार के पास संघ के खिलाफ कदम उठाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। रिपोर्ट बताती हैं कि RSS और हिंदू महासभा की गतिविधियों से ही ऐसा माहौल बना जिससे गांधीजी की हत्या हुई।”
🏛️ खड़गे का आरोप: मोदी सरकार ने हटाया पटेल का प्रतिबंध
खड़गे ने कहा कि सरदार पटेल के समय सरकारी कर्मचारियों को RSS जैसी संस्थाओं से जुड़ने पर रोक थी, लेकिन मोदी सरकार ने 9 जुलाई 2024 को यह 58 वर्षीय प्रतिबंध हटा दिया।
उनके अनुसार, इस कदम से अब सरकारी अधिकारी और कर्मचारी RSS की गतिविधियों में भाग ले सकते हैं।
खड़गे ने कहा कि यह फैसला सरदार पटेल की भावना के खिलाफ है, इसलिए सरकार को इसे वापस लेना चाहिए और RSS पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
📢 प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़गे का हमला
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि आज जब पूरा देश सरदार पटेल की जयंती मना रहा है, तब प्रधानमंत्री और बीजेपी पटेल के नाम का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है।
उन्होंने कहा, “अगर मोदी सरकार सच में सरदार पटेल का सम्मान करती है तो उन्हें उनके विचारों पर भी चलना चाहिए, सिर्फ मूर्ति दिखाने से देश नहीं चलता।”
🗣️ मोदी ने नेहरू पर साधा निशाना
उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के केवडिया में राष्ट्रीय एकता दिवस कार्यक्रम के दौरान पटेल को श्रद्धांजलि दी।
उन्होंने कहा कि सरदार पटेल चाहते थे कि कश्मीर का पूरा विलय भारत में हो, लेकिन नेहरू जी ने उनकी इच्छा पूरी नहीं होने दी।
मोदी ने कहा कि कांग्रेस की उस गलती की वजह से देश दशकों तक कश्मीर की आग में जलता रहा।
🏁 निष्कर्ष
पटेल जयंती पर एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी के बीच वैचारिक टकराव साफ दिखा।
एक ओर कांग्रेस RSS पर प्रतिबंध की मांग कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी पटेल के नाम पर नेहरू की आलोचना कर रही है।
देश की राजनीति में पटेल का नाम आज भी एक विचार और वैचारिक संघर्ष का प्रतीक बना हुआ है।

