Tejashwi Yadav News: RJD में ‘जननायक’ विवाद तेज, अब्दुल बारी सिद्दीकी और तेज प्रताप ने दी प्रतिक्रिया

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पटना (Bihar): आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। विवाद की वजह है — पार्टी के पोस्टर और होर्डिंग्स में तेजस्वी यादव को ‘जननायक’ बताना।
कुछ नेताओं ने इस उपाधि का विरोध किया है, जिससे पार्टी के भीतर खींचतान बढ़ गई है।


🗣️ सिद्दीकी बोले — “तेजस्वी को जननायक बनने में वक्त लगेगा”

पार्टी के वरिष्ठ नेता और महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी ने साफ कहा कि तेजस्वी यादव को अभी ‘जननायक’ बनने के लिए लंबा रास्ता तय करना होगा।
उन्होंने कहा — “तेजस्वी अभी लालू प्रसाद यादव की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। जब वह लालू जी और कर्पूरी ठाकुर के बताए मार्ग पर चलेंगे, तब जनता खुद उन्हें जननायक मानेगी।”
सिद्दीकी के इस बयान ने RJD के अंदर नई बहस को जन्म दिया है।


🧭 ‘पहले रास्ते पर चलें, तब बनेंगे जननायक’

अब्दुल बारी सिद्दीकी ने तेजस्वी को नसीहत भरे अंदाज़ में कहा —

“जो नेता जनता की तकलीफों को अपनी तकलीफ समझे, वही सच्चा जननायक होता है। पहले उस रास्ते पर चलना होगा।”

उनके इस बयान से पार्टी में यह संकेत गया कि RJD के अंदर नेतृत्व को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं, जबकि तेजस्वी को पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया जा चुका है।


🎤 तेज प्रताप यादव का सधा जवाब — “कर्पूरी ठाकुर ही असली जननायक”

विवाद में अब तेजस्वी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव भी कूद पड़े। उन्होंने कहा —

“कर्पूरी ठाकुर, लोहिया, बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी — ये सब असली जननायक हैं। जो लोग तेजस्वी को जननायक बता रहे हैं, उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए।”

तेज प्रताप का यह बयान साफ तौर पर सिद्दीकी के सुर में सुर मिलाता नज़र आया।


🏛️ “मेरे ऊपर गरीब जनता की छाया है” — तेज प्रताप

तेज प्रताप यादव ने परिवार के भीतर की राजनीतिक छाया का जिक्र करते हुए कहा —

“लालू जी जननायक थे। लालू जी की छत्रछाया तेजस्वी यादव और राहुल गांधी पर है। लेकिन मेरे ऊपर गरीब जनता और युवाओं की छत्रछाया है।”

उन्होंने कहा कि वे जनता के बीच जाकर काम करेंगे और “हम करके दिखाएंगे” के नारे के साथ आगे बढ़ रहे हैं।


🔥 RJD में बढ़ती अंदरूनी खींचतान

तेजस्वी यादव को पार्टी का भविष्य बताया जा रहा है, लेकिन लगातार आ रहे ऐसे बयान यह दर्शाते हैं कि RJD के वरिष्ठ नेताओं में एकरूपता की कमी है।
बिहार चुनाव से पहले इस तरह के विवाद पार्टी के लिए चुनौती साबित हो सकते हैं।

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