
🇺🇸 ट्रंप का बड़ा ऐलान — अमेरिका फिर करेगा परमाणु परीक्षण
वॉशिंगटन/बुसान: दक्षिण कोरिया के बुसान में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात से कुछ घंटे पहले, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘ट्रुथ’ पर एक बड़ा ऐलान किया।
उन्होंने कहा कि अमेरिका जल्द ही परमाणु हथियारों का परीक्षण फिर से शुरू करेगा। ट्रंप ने इस कदम को रूस और चीन की हालिया सैन्य गतिविधियों का जवाब बताया।
💣 1992 के बाद पहली बार होगा परीक्षण
अगर अमेरिका यह परीक्षण करता है, तो यह 1992 के बाद पहली बार होगा।
उस समय अमेरिका ने परमाणु परीक्षणों पर स्वैच्छिक रोक (moratorium) लगा दी थी।
ट्रंप का यह ऐलान अमेरिकी नीति में तीन दशक बाद का सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
🗣️ ट्रंप ने कहा — “मैं मजबूर हूं”
ट्रंप ने अपने बयान में लिखा,
“मुझे हमेशा परमाणु हथियारों की प्रकृति से नफरत रही है, लेकिन चीन और रूस से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण हमें हथियारों का विस्तार करना पड़ेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका के पास दुनिया में सबसे अधिक परमाणु हथियार हैं — और यह उनके पिछले कार्यकाल में ही संभव हुआ।
“यह सब मेरे लिए कठिन निर्णय था, लेकिन मेरे पास कोई विकल्प नहीं था,” — ट्रंप ने लिखा।
⚖️ अगले पांच साल में बराबरी पर आएंगे तीन देश
ट्रंप ने दावा किया कि वर्तमान में
- अमेरिका पहले स्थान पर,
- रूस दूसरे,
- और चीन तीसरे स्थान पर है।
लेकिन अगले 5 वर्षों में तीनों देश बराबरी पर आ जाएंगे।
इसलिए उन्होंने अमेरिकी युद्ध विभाग (Department of Defense) को निर्देश दिया है कि परमाणु हथियारों का समान परीक्षण तुरंत शुरू किया जाए।
🌍 क्या है इस फैसले के मायने?
यह फैसला अमेरिका की पुरानी परमाणु नीति में ऐतिहासिक बदलाव को दर्शाता है।
1992 के बाद से अमेरिका केवल कंप्यूटर सिमुलेशन और सब-क्रिटिकल परीक्षणों पर निर्भर था ताकि अपने हथियारों की सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रख सके।
अब ट्रंप का कदम वैश्विक तनाव और हथियारों की दौड़ को तेज कर सकता है।
⚔️ चीन और रूस भी बढ़ा रहे हैं परमाणु क्षमता
रूस ने हाल ही में कई प्रमुख हथियार नियंत्रण समझौतों (Arms Control Treaties) से खुद को अलग किया है और नई तकनीकों का परीक्षण किया है।
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ‘Poseidon’ परमाणु टॉरपीडो और ‘Burevestnik’ परमाणु क्रूज़ मिसाइल के सफल परीक्षणों की घोषणा की।
वहीं, चीन ने भी अपने परमाणु शस्त्रागार के आधुनिकीकरण की गति बढ़ा दी है।
🔎 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगा तनाव
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय परमाणु परीक्षण प्रतिबंध व्यवस्था (CTBT) को कमजोर कर सकती है।
अगर अमेरिका परमाणु परीक्षण शुरू करता है, तो रूस और चीन भी खुली प्रतिस्पर्धा में उतर सकते हैं, जिससे दुनिया एक नए ‘हथियारों की दौड़’ की ओर बढ़ेगी।

