फ्रांस के एवियन में आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक समुद्री सुरक्षा, नाविकों की सुरक्षा और ग्लोबल साउथ के देशों के हितों को लेकर महत्वपूर्ण बातें रखीं। आउटरीच सत्र में ‘नई साझेदारियां बनाना और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को फिर से मजबूत करना’ विषय पर संबोधन देते हुए प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के प्रभाव और वैश्विक व्यापार पर पड़ने वाले असर का उल्लेख किया।
पश्चिम एशिया संघर्ष पर जताई चिंता
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में हुए संघर्षों के कारण कई देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष में भारत के नागरिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ी।
मोदी ने कहा, “हम पश्चिम एशिया में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से हमारे मित्र देशों को नुकसान हुआ है। होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री व्यापार प्रभावित होने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है। भारत के कई नागरिकों ने अपनी जान गंवाई है।”
नाविकों की सुरक्षा को बताया वैश्विक जिम्मेदारी
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार को जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित बने रहने चाहिए ताकि नाविक बिना किसी भय और जोखिम के अपना कार्य कर सकें। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की स्थिरता के लिए समुद्री सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
ग्लोबल साउथ को साझेदार के रूप में देखने की अपील
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में ग्लोबल साउथ के देशों की आकांक्षाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विकासशील देश अब केवल सहायता प्राप्त करने वाले राष्ट्र नहीं रहना चाहते, बल्कि वैश्विक विकास प्रक्रिया में बराबर के भागीदार बनना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, “आज ग्लोबल साउथ की अपेक्षा सहारे की नहीं, बल्कि साझेदारी की है। हमें दाता-प्राप्तकर्ता की सोच से आगे बढ़कर समान सहयोगी के रूप में कार्य करना होगा। साझेदारी को निर्भरता से नहीं, बल्कि गरिमा और समानता से जोड़ना होगा।”
होर्मुज क्षेत्र की घटनाओं का संदर्भ
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा जारी है। हाल के दिनों में होर्मुज क्षेत्र में समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी थीं, जिससे वैश्विक बाजारों पर भी असर देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए अहम विषय बने रहेंगे।
G7 सम्मेलन में मोदी-ट्रंप की मुलाकात
G-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी मुलाकात हुई। समूह फोटो सत्र के बाद दोनों नेताओं ने हाथ मिलाया और कुछ समय तक बातचीत की।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह दोनों नेताओं की लगभग 16 महीने बाद आमने-सामने हुई मुलाकात थी। इससे पहले दोनों नेता पिछले वर्ष फरवरी में वाशिंगटन में मिले थे।
वैश्विक सहयोग पर भारत का जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान केवल सहयोग, साझेदारी और सामूहिक जिम्मेदारी से ही संभव है। उन्होंने सतत विकास, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक एकजुटता को भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल करने पर जोर दिया।

