मुंबई: मानसून के दौरान रेल सेवाओं को सुचारु बनाए रखने के उद्देश्य से मध्य रेल ने मुंबई मंडल में व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। जलभराव, भूस्खलन और अन्य मानसूनी चुनौतियों से निपटने के लिए रेलवे ने 117 जलभराव संभावित स्थानों की पहचान कर वहां 12.5 एचपी से 100 एचपी क्षमता तक के 210 हाई-कैपेसिटी जल निकासी पंप तैनात किए हैं। इसके साथ ही नालियों, पुलियों और पुलों के जलमार्गों की व्यापक सफाई भी की गई है।
42 पुलों का उन्नयन, संयुक्त मॉनिटरिंग पर जोर
रेलवे ने जलभराव की समस्या से निपटने के लिए 42 पुलों के उन्नयन का कार्य पूरा कर लिया है। साथ ही मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और नवी मुंबई महानगरपालिकाओं के साथ संयुक्त मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू की गई है, ताकि मानसून के दौरान किसी भी स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
18 संवेदनशील स्थानों के लिए विशेष कार्य योजना
मध्य रेल ने बाढ़ प्रभावित 18 प्रमुख स्थानों पर विशेष कार्य योजना लागू की है। सायन-कुर्ला, चुनाभट्टी-कुर्ला, विक्रोली-कंजुरमार्ग रोड और कुर्ला-तिलकनगर सहित छह महत्वपूर्ण स्थानों पर सुधार कार्य पूरे हो चुके हैं। वहीं पुल विस्तार, ट्रैक की ऊंचाई बढ़ाने, माइक्रो टनलिंग और जल निकासी सुधार से जुड़े दीर्घकालिक कार्य वर्ष 2028 तक चरणबद्ध तरीके से पूरे किए जाएंगे।
ठाणे माइक्रो टनलिंग परियोजना बनी बड़ी उपलब्धि
मानसून तैयारियों के तहत लगभग 5.50 करोड़ रुपये की लागत से ठाणे माइक्रो टनलिंग परियोजना पूरी कर ली गई है। इस परियोजना के तहत रेलवे ट्रैक के नीचे 110-110 मीटर लंबी दो आरसीसी पाइपलाइन बिछाई गई हैं, जिससे ठाणे स्टेशन पर वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है।
घाट सेक्शन में भूस्खलन रोकने के लिए आधुनिक सुरक्षा उपाय
कल्याण-लोनावला-कर्जत और कसारा-इगतपुरी घाट खंडों में भूस्खलन और चट्टान गिरने की घटनाओं को रोकने के लिए बोल्डर नेटिंग, फेसिंग, गैबियन संरचनाएं, रिटेनिंग वॉल और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। रेलवे का दावा है कि पिछले तीन वर्षों में इन प्रयासों के कारण घाट क्षेत्रों में मौसम जनित व्यवधानों में उल्लेखनीय कमी आई है।
यात्रियों को मिलेगी सुरक्षित और निर्बाध रेल सेवा
मध्य रेल का कहना है कि सभी तैयारियों के साथ वह मानसून के दौरान लाखों यात्रियों को सुरक्षित और निर्बाध रेल सेवा उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। रेलवे का फोकस जलभराव और भूस्खलन जैसी चुनौतियों का समय रहते समाधान कर लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों के संचालन को प्रभावित होने से बचाना है।

