मुंबई: मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) ने प्रस्तावित मेट्रो लाइन-14 (कांजुरमार्ग-बदलापुर) परियोजना के लिए नई व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह निर्णय आईआईटी मुंबई द्वारा पहले तैयार की गई डीपीआर में तकनीकी और वित्तीय कमियों की ओर ध्यान दिलाए जाने के बाद लिया गया है। नई रिपोर्ट में परियोजना की लागत, रूट, स्टेशनों की संख्या, यात्री अनुमान और आर्थिक व्यवहार्यता का दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा।
आईआईटी मुंबई ने पुरानी DPR में बताई थीं कई कमियां
एमएमआरडीए के अनुसार, आईआईटी मुंबई ने पहले तैयार की गई डीपीआर की समीक्षा के दौरान राइडरशिप (यात्री संख्या) के आकलन की पद्धति, परियोजना लागत के अनुमान, आर्थिक विश्लेषण और वित्तीय व्यवहार्यता में कई सुधारों की आवश्यकता बताई थी। इन सिफारिशों के आधार पर अब पूरी परियोजना का नए सिरे से अध्ययन कराया जाएगा।
नई रिपोर्ट में इन पहलुओं की होगी समीक्षा
नई फिजिबिलिटी स्टडी और डीपीआर में यात्री संख्या का नया अनुमान, ट्रैफिक मॉडलिंग, मेट्रो स्टेशनों के स्थान, एलाइनमेंट, निर्माण लागत तथा आर्थिक और वित्तीय व्यवहार्यता का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। एमएमआरडीए का उद्देश्य परियोजना को अधिक व्यावहारिक और भविष्य की परिवहन आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है।
43.69 किलोमीटर लंबा होगा मेट्रो कॉरिडोर
प्रस्तावित मेट्रो लाइन-14 का कॉरिडोर कांजुरमार्ग से बदलापुर तक लगभग 43.69 किलोमीटर लंबा होगा। इस रूट पर कुल 24 प्रस्तावित स्टेशन बनाए जाने की योजना है। मेट्रो लाइन धनसोली, कल्याण और अंबरनाथ जैसे प्रमुख क्षेत्रों से होकर बदलाापुर तक पहुंचेगी, जिससे मुंबई महानगर क्षेत्र और आसपास के उपनगरों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को भी किया जाएगा शामिल
एमएमआरडीए ने बताया कि संशोधित डीपीआर में इस मेट्रो कॉरिडोर के प्रभाव क्षेत्र में आने वाली प्रस्तावित और निर्माणाधीन प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं को भी शामिल किया जाएगा। इनमें विरार-अलीबाग मल्टीमॉडल कॉरिडोर, ऐरोली-कटाई फ्रीवे, धनसोली ट्रांस-हार्बर रेल एकीकरण, कल्याण रिंग रोड इंटरचेंज तथा एमएमआरडीए की अन्य प्रस्तावित सड़क और फ्लाईओवर परियोजनाएं शामिल होंगी।
बेहतर योजना के बाद आगे बढ़ेगी परियोजना
एमएमआरडीए का कहना है कि सभी तकनीकी सुझावों और संशोधनों को शामिल करने के बाद अंतिम डीपीआर तैयार की जाएगी। इसके आधार पर परियोजना की स्वीकृति और निर्माण कार्य की आगामी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी, जिससे भविष्य में यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जा सके।

