उत्तर प्रदेश सरकार ने संस्कृत विषय से पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब हाईस्कूल (10वीं) के बाद संस्कृत के छात्र सीधे आयुर्वेद डॉक्टर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे। राज्य सरकार गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर में पांच नए आयुर्वेद गुरुकुलम् स्थापित करने जा रही है, जहां इंटीग्रेटेड बीएएमएस (BAMS) कोर्स संचालित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक संस्कृत ज्ञान और आधुनिक आयुर्वेद चिकित्सा शिक्षा का बेहतर समन्वय स्थापित करना है।
10वीं के बाद मिलेगा इंटीग्रेटेड BAMS में प्रवेश
नई व्यवस्था के तहत संस्कृत विषय से पढ़ाई करने वाले छात्र हाईस्कूल के बाद सीधे इंटीग्रेटेड बीएएमएस कोर्स में प्रवेश ले सकेंगे। इस कोर्स में पहले छात्रों को प्री-आयुर्वेद शिक्षा दी जाएगी, जिसके बाद उन्हें नियमित बीएएमएस की पढ़ाई कराई जाएगी। इससे छात्र आयुर्वेद के मूल ग्रंथों को बेहतर तरीके से समझ सकेंगे।
इन पांच जिलों में खुलेंगे आयुर्वेद गुरुकुलम्
राज्य सरकार द्वारा जिन जिलों में आयुर्वेद गुरुकुलम् स्थापित किए जाएंगे, उनमें गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर शामिल हैं। सभी संस्थान केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे और विश्वविद्यालय ही इनके संचालन के लिए नोडल एजेंसी की भूमिका निभाएगा।
PAP-NEET परीक्षा से मिलेगा एडमिशन
इन गुरुकुलम् में प्रवेश के लिए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा पीएपी-एनईईटी (PAP-NEET) नाम से प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को इंटीग्रेटेड बीएएमएस कोर्स में दाखिला मिलेगा।
7.5 साल का होगा पूरा कोर्स
इंटीग्रेटेड बीएएमएस प्रोग्राम की कुल अवधि 7.5 वर्ष निर्धारित की गई है। इसमें पहले दो वर्ष प्री-आयुर्वेद शिक्षा, इसके बाद साढ़े चार वर्ष बीएएमएस की पढ़ाई और अंत में एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होगी। यह पूरी तरह आवासीय (रेजिडेंशियल) कोर्स होगा।
अस्पताल में मिलेगी क्लिनिकल ट्रेनिंग
हर आयुर्वेद गुरुकुलम् के साथ एक अस्पताल भी संचालित होगा, जहां छात्रों को मरीजों के उपचार की प्रक्रिया समझने और व्यावहारिक एवं क्लिनिकल प्रशिक्षण का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ वास्तविक चिकित्सा अनुभव भी प्राप्त होगा।
संस्कृत और आयुर्वेद का होगा बेहतर तालमेल
चरक संहिता, सुश्रुत संहिता जैसे आयुर्वेद के प्रमुख ग्रंथ संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं। नई व्यवस्था के तहत छात्र इन मूल ग्रंथों का अध्ययन कर आयुर्वेद की गहरी समझ विकसित कर सकेंगे। सरकार का मानना है कि इससे पारंपरिक भारतीय ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा शिक्षा के बीच मजबूत समन्वय स्थापित होगा।
आयुष मंत्री ने क्या कहा?
आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि यह योजना संस्कृत के छात्रों के लिए सुनहरा अवसर साबित होगी। उन्होंने कहा कि छात्र मूल आयुर्वेद ग्रंथों का अध्ययन कर कुशल चिकित्सक बन सकेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जहां एक साथ पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू किए जा रहे हैं।

